नई दिल्ली।  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार (7 मार्च) को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में 9वें अंतर्राष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल हुईं. उन्होंने यहां कार्यक्रम के लिए तय स्थल को लेकर ममता सरकार से सवाल कर दिए. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने इसे शर्मनाक बताया है. कहा कि टीएमसी ने सारी हदें पार कर दी हैं. राष्ट्रपति मुर्मू के बयान पर सीएम ममता बनर्जी ने कहा था कि वे बीजेपी की नीतियों के जाल में फंस गईं हैं।

‘ऐसा पहले कभी नहीं हुआ’

पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर इस पूरे मामले में अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की. सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ये शर्मनाक है, इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ. हर कोई जो लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास करता है, वह निराश है. सोशल मीडिया पोस्ट में पीएम ने लिखा राष्ट्रपति खुद एक आदिवासी समुदाय आती हैं. उन्होंने जो दर्द और पीड़ा जाहिर की है, उससे भारत के लोगों के मन बहुत दुखी है।

टीएमसी ने सारी हदें पार की- PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि पश्चिम बंगाल की TMC सरकार ने सच में सारी हदें पार कर दी हैं. राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जवाबदेह है. ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि पश्चिम बंगाल सरकार संथाल संस्कृति जैसे जरूरी विषयों पर लापरवाही बरत रही है. उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इस पद की पवित्रता का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए. उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल सरकार और TMC में समझदारी आएगी।

राष्ट्रपति ने जाहिर की थी नाराजगी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को सिलीगुड़ी के बिधाननगर में आयोजित 9वें अंतर्राष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल हुईं. उन्होंने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की गैर- मौजूदगी को लेकर सवाल उठा दिए. इसके साथ ही तय कार्यक्रम स्थल को लेकर उन्होंने कहा था कि वह छोटा है, जिससे बड़ी संख्या में संथाल समुदाय के लोग शामिल नहीं हो सके।

ममता बनर्जी का पलटवार

सीएम ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा कि वे राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं लेकिन कोई 50 बार आए तो कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ जा सकता है. उन्होंने आगे कहा कि उन्हें उस कार्यक्रम की जानकारी नहीं है. वे धरने पर बैठी हैं. बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी ने राष्ट्रपति को अपना एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए भेजा है. वे बीजेपी की नीतियों के जाल में फंस गई हैं।