बच्चा नहीं खाता खाना? जानिए सामान्य नखरे और ARFID में क्या है अंतर
क्या आपका बच्चा भी खाने की थाली देखते ही दूर भागने लगता है? अमूमन हर घर में माता-पिता की यह एक आम शिकायत होती है। कोई बच्चा सिर्फ गिने-चुने चावल खाता है, तो कोई केवल जंक फूड के लिए अड़ा रहता है। अक्सर परिवार के सदस्य इसे बच्चे की जिद, नखरे या खराब आदत मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह महज एक नखरा नहीं, बल्कि खानपान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर विकार हो सकता है?
चिकित्सा विज्ञान में इसे अवायडेंट रेस्ट्रिक्टिव फूड इनटेक डिसऑर्डर (ARFID) कहा जाता है। यह बच्चों के खानपान से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है, जिसमें बच्चा भोजन के खास स्वाद, रंग, गंध, बनावट या अतीत के किसी कड़वे अनुभव (जैसे गले में खाना अटकना) के कारण कई जरूरी चीजों को खाने से पूरी तरह बचने लगता है। इसका सीधा असर बच्चे की लंबाई, वजन, दिमागी विकास, पढ़ाई और उसके सामाजिक व्यवहार पर पड़ता है। हाल ही में स्टैनफोर्ड मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने एक शोध में इस बीमारी के इलाज को लेकर बड़ी सफलता हासिल की है।
बच्चों में एआरएफआईडी के गंभीर लक्षण और खतरे
मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन बच्चे इसके सबसे आसान शिकार बनते हैं। एआरएफआईडी के कारण बच्चों के मन में खाने को लेकर एक अनजाना डर या पूरी तरह अरुचि पैदा हो जाती है।
पोषक तत्वों की भारी कमी:
अगर समय रहते इस विकार की पहचान न की जाए, तो बच्चों के शरीर में आयरन, विटामिन और प्रोटीन जैसे आवश्यक तत्वों की भारी कमी हो जाती है। गंभीर मामलों में बच्चों को सप्लीमेंट्स या ट्यूब फीडिंग तक देनी पड़ती है। शोध बताते हैं कि इस बीमारी से पीड़ित बच्चों में अक्सर एंग्जाइटी, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर और एडीएचडी (ADHD) जैसी मानसिक स्थितियां भी देखी जाती हैं।
वैज्ञानिकों को मिली इलाज में पहली बड़ी सफलता
'जर्नल ऑफ द अमेरिकन एकेडमी ऑफ चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री' में छपे एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, पहली बार इस बीमारी के उपचार का वैज्ञानिक तरीके से 'रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल' किया गया है।
यह विशेष शोध 6 से 12 वर्ष के 98 बच्चों पर किया गया। मुख्य शोधकर्ता जेम्स लॉक ने बताया कि अब इस बीमारी के इलाज के लिए पुख्ता वैज्ञानिक डेटा मौजूद है, जिसकी मदद से बच्चों का सटीक और बेहतर इलाज किया जा सकता है।
दो विशेष थेरेपी से सुधरेगी बच्चों की सेहत
इस रिसर्च के दौरान बच्चों को ऑनलाइन माध्यम से चार महीनों तक दो अलग-अलग थेरेपी दी गईं, जिनके परिणाम बेहद सकारात्मक रहे:
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1. फैमिली-बेस्ड थेरेपी (पारिवारिक चिकित्सा): इसमें माता-पिता और भाई-बहनों को शामिल किया गया। थेरेपिस्ट ने परिवार को सिखाया कि बच्चे की खाने की आदतों को बिना दबाव बनाए धीरे-धीरे कैसे बदला जाए। इससे माता-पिता यह समझ पाए कि बच्चा जानबूझकर नाटक नहीं कर रहा, बल्कि यह एक मेडिकल कंडीशन है। इस थेरेपी से बच्चों का वजन तेजी से बढ़ा।
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2. इंडिविजुअल मोटिवेशनल थेरेपी (व्यक्तिगत प्रेरणा): इसमें बच्चों को खुद खेलों, गतिविधियों और काल्पनिक रेस्टोरेंट बनाने जैसी दिमागी कसरतों के जरिए नए-नए खानपान को आजमाने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे भोजन में उनका कौतूहल और रुचि दोबारा जाग सके।
क्या कहते हैं बाल रोग विशेषज्ञ?
चिकित्सा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि एआरएफआईडी (ARFID) को सामान्य ईटिंग हैबिट्स समझने की भूल बिल्कुल न करें। यह एक वास्तविक शारीरिक और मानसिक चुनौती है। अच्छी बात यह है कि सही समय पर काउंसलिंग, उचित थेरेपी और परिवार के सकारात्मक सहयोग से इस बीमारी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है और बच्चों को एक स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है।
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