यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की नवीनतम शोध रिपोर्ट के अनुसार, विनिर्माण और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आई सुस्ती के चलते मार्च महीने के औद्योगिक आंकड़ों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की विकास दर मार्च में घटकर मात्र 2% रह जाएगी।

यह गिरावट इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि फरवरी 2026 में यह दर 5.2% थी और मार्च 2025 में 3.9% रही थी।


औद्योगिक सुस्ती के प्रमुख कारण

औद्योगिक गतिविधियों में इस मंदी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं:

  • विनिर्माण में गिरावट: मैन्युफैक्चरिंग PMI मार्च में गिरकर 53.9 पर आ गई, जो जून 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। बढ़ती इनपुट लागत और सप्लाई चेन में बाधाओं ने उत्पादन मार्जिन पर बुरा असर डाला है।

  • बुनियादी ढांचा (Core Sector): आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में मार्च में 0.4% की गिरावट आई है। पिछले 19 महीनों में यह इन क्षेत्रों का सबसे कमजोर प्रदर्शन है।

  • सेक्टरवार स्थिति: जहां स्टील, सीमेंट और नेचुरल गैस के उत्पादन में सुधार दिखा, वहीं कोयला, कच्चा तेल और बिजली जैसे क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा असर उर्वरक उत्पादन पर पड़ा, जिसमें मासिक आधार पर 25.9% की कमी आई।


आर्थिक संकेतकों की मिली-जुली स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ उच्च-आवृत्ति वाले संकेतकों (High-frequency indicators) ने बाजार की मिली-जुली तस्वीर पेश की है:

संकेतक मार्च का प्रदर्शन विश्लेषण
GST राजस्व 8.8% वृद्धि फरवरी (8.1%) के मुकाबले सुधार, जो बेहतर खपत को दर्शाता है।
ई-वे बिल 12.9% वृद्धि वृद्धि जारी है, लेकिन फरवरी (18.8%) के मुकाबले रफ्तार धीमी हुई है।
वाहन बिक्री 25.3% वृद्धि टू-व्हीलर और ट्रैक्टरों की मांग मजबूत रही, हालांकि कारों की बिक्री कुछ सुस्त पड़ी।
ईंधन खपत मिश्रित पेट्रोल (7.6%) और डीजल (8%) की मांग बढ़ी, लेकिन विमान ईंधन (ATF) की मांग में भारी गिरावट आई।

बिजली और मौसम का प्रभाव

मार्च के शुरुआती दिनों में उम्मीद से अधिक बारिश होने के कारण गर्मी का प्रकोप कम रहा। इसके चलते कूलिंग उपकरणों की जरूरत कम हुई और बिजली की मांग सामान्य स्तर पर बनी रही।