मोटापा बना 'साइलेंट किलर': 30 की उम्र से पहले वजन बढ़ना मतलब असमय मौत को बुलावा।
मोटापे का बढ़ता संकट: क्या आपने कभी इस पर गौर किया है कि वजन बढ़ने या मोटापे को जिस तरह हम बचपन में हंसी-मजाक में टाल देते थे, वही आगे चलकर स्वास्थ्य के लिए एक ऐसा भयावह खतरा बन सकता है जिसकी कल्पना करना भी कठिन है। पेट के आसपास एकत्रित चर्बी हो या उच्च बॉडी मास इंडेक्स (BMI), ये वर्तमान समय में हमारी जीवनशैली के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। शोधों में इसे 'साइलेंट किलर' की संज्ञा दी जा रही है। विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यदि आप मोटापे से ग्रस्त हैं, तो यह स्थिति असमय मृत्यु का कारण भी बन सकती है।
जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड की बढ़ती लत, घंटों स्क्रीन के सामने बैठे रहना, शारीरिक सक्रियता में कमी और अत्यधिक मीठे का सेवन—ये सभी कारक हमें मोटापे की ओर धकेल रहे हैं। अब तक के कई शोधों में यह स्पष्ट हो चुका है कि अधिक वजन वाले व्यक्तियों में डायबिटीज, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों का खतरा काफी अधिक होता है।
हालिया शोध की चेतावनी: एक नवीनतम अध्ययन की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि आप कम उम्र में ही मोटापे का शिकार हो जाते हैं, तो यह आपकी आयु को कम कर सकता है।
संपूर्ण स्वास्थ्य पर प्रभाव: शोधकर्ताओं का मानना है कि मोटापे का सबसे घातक पहलू यह है कि यह धीरे-धीरे प्रभाव डालता है। शुरुआत में थकान, सांस फूलना या मामूली कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं, जो कालांतर में गंभीर रोगों में परिवर्तित हो जाते हैं। शरीर में वसा का जमाव हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे चयापचय (Metabolism) मंद पड़ जाता है और शरीर बीमारियों का केंद्र बन जाता है। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, 30 वर्ष की आयु से पूर्व वजन बढ़ना मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक बढ़ा देता है।
अध्ययन के चौंकाने वाले तथ्य: इन खतरों को समझने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने करीब 6 लाख से अधिक ऐसे लोगों के स्वास्थ्य का विश्लेषण किया, जो 30 साल की उम्र से पहले मोटापे की चपेट में आ गए थे। स्वीडन की लुंड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए इस शोध में पाया गया कि 17 से 29 वर्ष की आयु के बीच मोटापा होने से जल्दी मृत्यु का खतरा 70 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
'ई-क्लीनिकल मेडिसिन' जर्नल में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार, वजन में वृद्धि और वह किस उम्र में हुई है, ये दोनों ही अत्यंत गंभीर विषय हैं। शोध में 17 से 60 वर्ष के लोगों के वजन का विश्लेषण किया गया, जहाँ पाया गया कि तेजी से वजन बढ़ने वाले लोगों में हृदय रोग और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से मृत्यु की आशंका सर्वाधिक थी।
विशेषज्ञों की राय: अध्ययन की मुख्य लेखिका तान्या स्टॉक्स कहती हैं कि वजन बढ़ना तो हानिकारक है ही, परंतु कम उम्र में इसका बढ़ना और भी खतरनाक है। मोटापा टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और कम से कम 13 प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। डॉ. हुयेन ले के अनुसार, जो लोग युवावस्था में ही मोटापे का शिकार होते हैं, उन्हें इसके जैविक दुष्परिणाम लंबे समय तक भुगतने पड़ते हैं। यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि मोटापे को हल्के में लेना जीवन पर भारी पड़ सकता है।
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