मध्य प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी, हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है. अब यह मुद्दा हाई कोर्ट पहुंच गया है. शिक्षकों की कमी को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूरे प्रदेश में शिक्षकों की कमी पर चिंता जाहिर की है. साथ ही हाई कोर्ट ने सरकार से हलफनामे पर जवाब मांगा है कि वह बताएं कि प्रदेश में कितने सरकारी स्कूल हैं और कितने शिक्षकों की कमी है।
MP कितने शिक्षकों की कमी?
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के प्रावधानों का उल्लंघन होने का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. मामला सिर्फ डिंडौरी जिले के सरकारी स्कूलों से संबंधित था, लेकिन अदालत मित्र के आग्रह पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सरकार से हलफनामे पर जवाब मांगा है. बेंच ने पूछा है कि प्रदेश में कुल कितने सरकारी स्कूल हैं और वहां पर शिक्षकों के कुल कितने पद खाली हैं? इस मामले में अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।
क्या है पूरा मामला?
डिंडौरी के किसान लोक सिंह की ओर से मध्य प्रदेश में जनहित याचिका दायर की गई थी. इस जनहित याचिका में कहा गया है कि RTE कानून लागू हुए 15 साल से अधिक हो चुके हैं, फिर भी प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति के वैधानिक दायित्व को निभाने में मप्र सरकार असफल रही है. याचिका में दावा किया गया है कि 102 सरकारी स्कूल बिना किसी शिक्षक के चल रहे हैं, जबकि 499 स्कूलों में कम शिक्षकीय स्टाफ हैं. याचिका में कहा गया है कि अकेले जबलपुर शहर में 54 स्कूल ऐसे हैं, जो शिक्षकों की कमी से बंद होने की कगार पर हैं. सरकार से पूछा जाए कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के कुल कितने पद खाली हैं, ताकि उनको भरने के संबंध में न्यायालय द्वारा जरूरी निर्देश दिए जा सकें।
दतिया पुलिस द्वारा सोनागिर जैन मंदिर चोरी प्रकरण के त्वरित खुलासे पर जैन समाज ने डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा का किया सम्मान
भारत-इटली रक्षा सहयोग मजबूत, सैन्य हार्डवेयर निर्माण पर बनी सहमति
होर्मुज विवाद पर बढ़ा तनाव, Iran पर भरोसा नहीं: United Arab Emirates
ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर Zohran Mamdani, कोहिनूर पर बयान चर्चा में
पश्चिम बंगाल में 15 मतदान केंद्रों पर दोबारा वोटिंग का आदेश