कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने प्रवचन में पूछा तीखा सवाल, नशेड़ी युवकों के समूह ने किया हंगामा
मथुरा: देश के चर्चित कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज समय-समय पर लोगों को जागरूक करते हुए नजर आते हैं। कभी पति-पत्नी के झगड़े तो कभी सास और बहू के झगड़े को लेकर अपना पक्ष रखते दिखते हैं। अनिरुद्धाचार्य देश और समाज के प्रति भी लोगों को जागरूक करते हैं। उनका एक नया वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने युवाओं को नशे के प्रति जागरूक किया है। अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि आप जैसे युवा अगर नशे में उलझे रहेंगे तो देश का भला कौन सोचेगा। नसीहत देते हुए कहा कि नशा करके क्यों मौत को दावत दे रहे हो। दरअसल कार्यक्रम के दौरान एक युवक ने अनिरुद्धाचार्य से अपनी समस्या को साझा किया है। युवक ने बताया कि अक्टूबर-नवंबर में उसका हार्ट ऑपरेशन होना है, लेकिन सिगरेट की लत छूट नहीं रही है। इस पर अनिरुद्धाचार्य ने सवाल किया कि क्या सिगरेट अपने आप आपके मुंह में आकर घुस जाती है?
'दोस्त मुझे गलत राह पर ले गए'
युवक ने जवाब दिया कि दुकान पर जाते ही सबसे पहले सिगरेट खरीद लेता हूं। रोजाना 10 से 12 सिगरेट पीता हूं, जिस पर लगभग 120 रुपये खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा 60-70 रुपये गुटके पर और क्रिकेट मैचों में सट्टेबाजी की आदत के चलते लाखों रुपये पहले ही हार चुका है। युवक ने कहा कि दोस्त ही उसे गलत राह पर ले गए हैं और घरवालों के सामने सीधे बनकर उसका भरोसा तोड़ते हैं।
क्यों मौत को निमंत्रण दे रहे हो?
इस पर अनिरुद्धाचार्य ने युवक को समझाते हुए कहा कि अब तुम सिगरेट ना पियो, इसे छोड़ दो। सिगरेट पियोगे और सिगरेट पियोगे तो स्वस्थ थोड़े हो जाओगे। क्यों मौत को निमंत्रण दे रहे हो? साथ ही उन्होंने जुआ ना खेलने की भी नसीहत दी है।
'पत्नी के सामने सिगरेट नहीं पीता हूं'
युवक ने कहा कि दुकानदार कहता है कि सिगरेट का धुआं अंदर मत लो, उसे बाहर फेंक दोगे तो कुछ नहीं होगा। साथ ही युवक ने बताया कि उसकी लव मैरिज हुई है। वह पत्नी के सामने सिगरेट नहीं पीता है क्योंकि होम मिनिस्टर इज होम मिनिस्टर।
'मेरी हुक्का पीने की आदत नहीं जा रही है'
इसी बीच, एक दूसरे युवक ने अनिरुद्धाचार्य से कहा कि मेरी हुक्का पीने की आदत नहीं जा रही है। दोस्तों की वजह से आदत लग गई है। इसपर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि आप युवा हो, अच्छा कमाओ और राष्ट्र के लिए सोचो। नशा से आपका भला नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आप जैसे युवा नशे में उलझ गए हैं तो देश के लिए कौन सोचेगा।
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