सवाल दर सवाल

नमो-शिवाय की “लेपटॉप “पॉलिटिक्स

भोपाल से राकेश अग्निहोत्री@mplive24

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अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जन्मस्थली भाबरा के मंच पर नमो-शिवाय की जोड़ी मध्यप्रदेश में सातवीं बार एक बार फिर साथ नजर आई। जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर पर अपनी चुप्पी तोड़ी तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मोदी की उस लाइन को आगे बढ़ाया जिसने भूले-बिसरे अमर शहीदों की याद ताजा कर दी है। इस दौरान प्रस्तावित तिरंगा यात्रा से लेकर राष्ट्रभक्ति के भी चर्चे जोर शोर से किए गए लेकिन नरेंद्र मोदी ने लेपटॉप की भूमिका को विकास से जोड़ा तो शिवराज की नई मुहिम जिसमंे मुख्यमंत्री ने लेपटाप के जरिये एजुकेशन को अपना पॉलिटिकल एजेंडा बना दिया, की याद ताजा कर दी। लेपटॉप का िजक्र भले ही शिवराज ने इस मंच से नहीं िकया लेकिन दो दिन पहले ही उन्होंने भी शहडोल के अपने दौरे के दौरान लेपटॉप और स्मार्ट फोन के जरिए उन युवाओं का भरोसा जीतने की एक नई कोशिश शुरू की है जो अगले चुनाव में मतदाता के तौर पर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है कि नमो-शिवाय की जोड़ी जिनका लक्ष्य विकास की राजनीति कर देश और प्रदेश को एक नई पहचान देना है आखिर लेपटॉप को लेकर सिर्फ पॉलिटिक्स कर रहे हैं या फिर वाकई गंभीर हैं।लेपटॉप हो या स्मार्ट फोन दोनोें ने देश में एक क्रांति लाई है और प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी ने उसका बेहतर उपयोग कर सोशल मीडिया के जरिए अपना वोट बैंक भी मजबूत किया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद तो मोदी सरकार ने हर विभाग के एप लांच कर सुदूर क्षेत्रों तक यह संदेश दिया है कि आप घर बैठे जानकारियां ही नहीं जुटा सकते हैं बल्कि खुद भी समस्याओं से निजात पाकर आगे बढ़कर मुख्य धारा में शामिल हो सकते हैं। मोदी ने तो अपनी कैबिनेट के सहयोगी और सांसदों को एप के जरिए वन टू वन जोड़कर एक ऐसा सिस्टम बनाया है जिससे ऊपर से नीचे तो नीचे से ऊपर संवाद, समन्वय स्थापित कर समस्याओं का समय रहते न सिर्फ समाधान निकाला जा सकता है बल्कि नए सुझावों के साथ आगे बढ़ सकते हैं। प्रधानमंत्री का भाबरा में दिया गया बयान कि िजन युवा कश्मीरियों और किशोरों के हाथ किताब, गेंद के साथ लेपटॉप होना चाहिए उन्हें देश के दुश्मनों ने पत्थर और हिंसा का सामान पकड़ा दिया है, गौर करने लायक है। क्योंकि मोदी और उनकी सरकार अच्छी तरह जानती है कि युवाओं की भूमिका कितनी अहम हो गई है। इसे संयोग ही कहेंगे कि जिस लेपटॉप का जिक्र मोदी ने कश्मीर के हालात को लेकर बयां किए उस लेपटॉप का जिक्र इन दिनों शिवराज की जुबां पर भी खूब है। शहडोल उपचुनाव के ऐलान से पहले सरकारी दौरे पर गए मुख्यमंत्री ने स्मार्ट फोन और लेपटॉप उन युवाओं के हाथ में सौंपने की मुहिम चलाई है जो स्कूल की पढ़ाई पूरी कर कॉलेज की ओर कदम बढ़ा रहे हैं यानी या तो वोटर बन चुका है या फिर जल्द ही उसका नाम मतदाता की सूची में शामिल हो जाएगा। शिवराज ने लेपटॉप का लॉलीपॉप देकर विद्यार्थियों में न सिर्फ जोश भरा है बल्कि एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी शुरू की है। शिवराज सरकार की इस योजना की लांचिंग आदिवासी बहुल क्षेत्र शहडोल में की गई तो अब अन्य सुविधाओं के साथ इसका बड़ा ऐलान 15 अगस्त के विशेष मौके पर करेंगे। यानी प्रधानमंत्री हों या मुख्यमंत्री दोनों लेपटॉप के जरिए युवाओं को रिझाने में जुट गए हैं। शिवराज सिंह तो युवाओं का यह कहकर आव्हान कर रहे हैं कि मेरे बेटा बेटियों लेपटॉप और स्मार्ट फोन के जरिए दुनिया अपनी मुट्ठी में कर लो। यह पहला मौका नहीं है जब मध्यप्रदेश में लेपटॉप की चर्चा है। करीब ढाई साल पहले विधानसभा चुनाव से पूर्व शिवराज ने खबरनवीसों के लिए एक लेपटॉप योजना शुरू की थी जिसे तीसरी बार सरकार बनने के बाद अंजाम तक भी पहुंचाया जा चुका है। नमो-शिवाय की मजबूत होती कैमेस्ट्री जब चर्चा में है तो दोनों की कार्यशैली भी चर्चा में है। जिस पर एक लंबी बहस हो सकती है। जब भारत को विश्व में एक नई पहचान दे चुके नरेंद्र मोदी बड़े सभागृह और स्टेडियम में ओबामा की स्टाइल में बुद्धिजीवियों से रूबरू होते हैं तो शिवराज ठेठ देसी अंदाज में गांवों और चौपाल की खाक छानकर प्रदेश की उस जनता से मुखातिब होते हैं जिसे वो भाग्य विधाता मानते हैं। मोदी ने लेपटॉप, स्मार्ट फोन और कम्प्यूटर का बेहतर इस्तेमाल कर देश की राजनीति को जो एक नई पहचान दी है शिवराज भी उस लाइन पर आगे बढ़ रहे हैं चाहे फिर वो ट्वीटर, फेसबुक और दूसरे फोरम ही क्यों न हों लेकिन जिस तेजी से शिवराज सिंह को सोशल मीडिया का बेहतर इस्तेमाल कर लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप अनुभवी सीएम होने के नाते दूसरे राज्यों की तुलना में आगे निकलते हुए नजर आना चाहिए उसमें सुधार की गुंजाइश महसूस की जा रही है। टीम शिवराज ने सरकारी ढांचे से बाहर निकलकर निजी एजेंसी और कंपनी की मदद से इस मिशन को आगे जरूर बढ़ाया है लेकिन बहुत कुछ करना अभी बाकी है।
मोदी के बयान के मायने
डिजिटल इंडिया की शक्ति को समझने और नई पीढ़ी को इसके उपयोग का संस्कार देने वाले प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज के दिन जो आव्हान किया है वह सामान्य बात नहीं है कि जिन बालकों के हाथ में, जिन युवकों के हाथ में, जिन बच्‍चों के हाथ में लेपटॉप होना चाहिए, मन में सपने होने चाहिए, आज ऐसे निर्दोष बालकों के हाथ में पत्‍थर पकड़ा दिये जाते हैं। कुछ लोगों की राजनीति तो चल पाएगी, लेकिन मेरे इन भोले-भाले बालकों का क्‍या होगा? कुल मिलाकर मोदी ने यह बात अचानक नहीं कही। इसके पीछे उनका पक्का इरादा है डिजिटल मीडिया के साथ-साथ उनके संसाधनों का बेहतर उपयोग हो। क्योंकि मोदी ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। डिजिटल इंडिया की भारत को डिजिटल रूप से सशक्‍त समाज और ज्ञानपूर्ण अर्थव्‍यवस्‍था में परिवर्तित करने के लिए एक महत्‍वाकांक्षी कार्यक्रम के रूप में परिकल्‍पना है। ज्ञानपूर्ण अर्थव्‍यवस्‍था बनाने के लिए और समस्‍त सरकार की समकालिक और समन्वित भागीदारी द्वारा प्रत्‍येक नागरिक के लिए सुशासन लाने के उद्देश्‍य से इस अकेले कार्यक्रम के अधीन विभिन्‍न पहलों को शामिल किया गया है। यह कार्यक्रम इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विभिन्‍न केन्‍द्रीय मंत्रालयों व विभागों और राज्‍य सरकारों के सहयोग से तैयार और समन्वित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं डिजिटल इंडिया की निगरानी समिति के अध्‍यक्ष हैं, इसलिये डिजिटल इंडिया के अधीन गतिविधियों पर सावधानीपूर्वक निगरानी की जा रही है। सरकार मोदी के कार्यक्रम के अनुसार डिजिटल मध्यप्रदेश की दिशा में काम कर रही है। यह बात जरूर है कि मुख्यमंत्री और उनके कैबिनेट सहयोगी व नौकरशाह मोदी की टीम के मुकाबले सोशल मीडिया का उपयोग करने में फिलवक्त पीछे हैं।

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार राकेश अग्निहोत्री स्वराज एक्सप्रेस मध्य प्रदेश/छत्तीसगढ़ के पॉलिटिकल एडिटर हैं।

Source ¦¦ राकेश अग्नोहोत्री