ऊर्जा मंत्री श्री प्रियव्रत सिंह ने कहा है कि विभिन्न ताप गृहों को उनकी जरूरत और मांग के अनुरूप कोल कम्पनी द्वारा कोयला उपलब्ध नहीं करवाया जाता है। श्री सिंह ने बताया कि अक्टूबर में संजय गांधी ताप विद्युत गृह को कोयले की जरूरत के अनुसार कोरिया-रीवा क्षेत्र से 110 रेक एवं कोरबा क्षेत्र सें 40 रेक, कुल 150 रेक का रेल प्रोग्राम कोयला कंपनी को भेजा गया था। इसके विरूद्ध कोयला कम्पनी द्वारा कोरिया-रीवा से 90 और कोरबा क्षेत्र से मात्र 34 रेक, कुल 124 रेक आवंटित किये गए। इसके बावजूद कोयला कम्पनी ने कोरिया-रीवा क्षेत्र से 47 रेक और कोरबा क्षेत्र में मात्र 16 रेक कुल 63 रेक दिये । इसी तरह रेल प्रोग्राम 150 रेक का भेजा गया और आवंटन 124 रेक का हुआ और दिये गये कुल 63 रेक। कोल कम्पनी से आधे से भी कम रेक प्राप्त हुए।

ऊर्जा मंत्री श्री सिंह ने बताया कि इसी प्रकार अन्य ताप विद्युत गृहों में भी आवश्यकतानुसार कोल प्रदाय नहीं किया जाता है। एक बार आवंटन होने के बाद उसके अनुसार कोयला भेजने की जिम्मेदारी कोल कम्पनी की होती है। श्री सिंह ने बताया है कि मध्यप्रदेश पावर जनरेशन कम्पनी लिमिटेड का हमेशा यह प्रयास होता है कि सभी ताप विद्युत गृहों को समय पर आवश्यकतानुसार कोयला उपलब्ध हो, जिससे सभी इकाइयों का सुचारू संचालन हो सके।

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि विद्युत गृहों में कोयला प्रदाय करने की जिम्मेदारी रेल परिवहन और कोयला कम्पनी की होती है। प्रत्येक विद्युत गृह के लिये कोयला अनुबंध के तहत मासिक पात्रतानुसार मध्यप्रदेश पावर जनरेशन कम्पनी लिमिटेड द्वारा रेल प्रोग्राम संबंधित कोल कम्पनियों को भेजा जाता है। इसी के आधार पर मासिक रेल प्रोग्राम स्वीकृत होता है।

ऊर्जा मंत्री श्री प्रियव्रत सिंह ने बताया है कि केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा नियोजित खदान छोर से दूरस्थ विद्युत गृह में कम से कम 20 दिन का कोयला स्टाक होना जरूरी है। इसके बावजूद भी कोल कम्पनियों ने कोयला उपलब्ध नहीं करवाया है। इसके लिये पूरी तरह कोल कम्पनियां जिम्मेदार हैं।