दीपक ने फिर नग़मे गाये,उजियारा हर्षाया ।
रोशनियों के दिन आये हैं,अँधियारा घबराया ।।

समाचार खुशियों के फैले
सूरज हरकारा है 
अपनेपन औ' नेह-प्रीति का
अब  तो जयकारा है

आतिशबाज़ी ने हौले से,सबका साथ निभाया ।
झंझावातों में जलकर भी,दीपक है मुस्काया ।।

माहिष्मती में धूम मची है
हर इक है उल्लासित
गली-मोहल्ला/सारी बस्ती
आज हुये आह्लादित

महल,झोंपड़ी चहक रहे सब,सबने मंगल गाया ।
पर्व सात्विक,चंदन-वंदन,हर इक जन को भाया ।।

मैहरवाली माँ ने सबको
दिया नवल वरदान
है आलोकित हर घर-आँगन
लक्ष्मी का जयगान

अपनेपन के सुर बिखरे हैं,हर पल है मुस्काया ।
दीपपर्व का अभिनंदन है,उजियारा हर्षाया ।।