पटना, ।  चार राज्यों में विधानसभा चुनाव लडऩे के लिए जदयू नए दोस्तों की तलाश कर रहा है। जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने झारखंड, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली विधानसभा चुनाव में सक्रिय भागीदारी का फैसला किया है।

पहले संभावना जाहिर की जा रही थी कि जदयू इन राज्यों में अकेले विधानसभा चुनाव लड़ेगा। लेकिन, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने मंगलवार को दैनिक जागरण से बातचीत में बताया कि जदयू इन राज्यों में क्षेत्रीय दलों से तालमेल की संभावनाओं की तलाश करेगा।

दिल्ली विधानसभा पर चर्चा के लिए अगले सप्ताह बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा-इन राज्यों में भाजपा के पास जदयू के लिए स्पेस नहीं है। लिहाजा, दूसरे दलों से तालमेल की गुंजाइश है।

हरियाणा में जदयू की जननायक जनता पार्टी से दोस्ती हो सकती है। इसका गठन इंडियन नेशनल लोकदल से निकाले गए दुष्यंत चौटाला ने किया है। लोकसभा चुनाव में भले ही उन्हें कामयाबी नहीं मिली लेकिन, विधानसभा चुनाव को लेकर वे उत्साहित हैं।

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पिछली दिल्ली यात्रा में दुष्यंत ने उनसे मुलाकात की थी। त्यागी के मुताबिक यह शिष्टाचार मुलाकात थी। इसमें चुनाव को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। लेकिन, दुष्यंत से चुनावी दोस्ती संभव है। 

केसी त्यागी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के ग्राम पंचायतों के चुनाव में जदयू को ठीक-ठाक कामयाबी मिली। इससे पार्टी का उत्साह बढ़ा है। वहां जब कभी चुनाव हो, जदयू अपना उम्मीदवार देगा।

तरह झारखंड में जदयू को बाबू लाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा में संभावनाएं दिख रही हैं। मरांडी और नीतीश कुमार के संबंध पहले से अच्छे हैं। भाजपा से जदयू के अलगाव के दिनों में मरांडी से दोस्ती की बातचीत भी चली थी।

मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री हैं। उनकी सरकार जदयू के आठ विधायकों के समर्थन से ही बनी थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में मरांडी कांग्रेस की अगुआई वाले महागठबंधन के साथ लड़े थे। खराब अनुभव रहा। सो, विधानसभा चुनाव में जदयू से दोस्ती की गुंजाइश बनती है। 

दिल्ली विस चुनाव पर चर्चा करने के लिए अगले सप्ताह बैठक

राज्य के जल संसाधन मंत्री और दिल्ली प्रदेश जदयू के प्रभारी संजय झा ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाने के लिए अगले सप्ताह बैठक होगी। इसमें चुनाव लडऩे लायक विधानसभा सीटों की शिनाख्त की जाएगी।

उन्होंने कहा कि 2005 में नीतीश कुमार की सरकार बनी। लेकिन, तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने कभी राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र संसद या बिहार के बाहर नहीं किया। इसका असर दूसरे राज्यों में पार्टी के विस्तार पर पड़ा।

अब दूसरे राज्य के लोग नीतीश सरकार की उपलब्धियों से प्रभावित होकर जदयू की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसका लाभ दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिलेगा।

संजय झा ने बताया कि दिल्ली नगर निगम के चुनाव में 68 वार्डों में जदयू के उम्मीदवार खड़े थे। दर्जन भर उम्मीदवारों को पांच हजार से अधिक वोट मिले। हम उन इलाकों में अपने उम्मीदवार दे सकते हैं, जहां की आबादी में पूर्वांचल की बहुलता है।