भोपाल लोकसभा सीट (Bhopal Loksabha Seat) की बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Sadhvi Pragya Singh Thakur) ने 2008 के मालेगांव विस्फोट में मारे गए एक युवक के पिता की उस याचिका के एनआईए की एक विशेष अदालत से खारिज करने पर खुशी जताई है, जिसमें उन्हें चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

प्रज्ञा मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी हैं और फिलहाल जमानत पर हैं। वह भाजपा के टिकट पर मध्य प्रदेश के भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं और इस सीट पर उनका मुख्य मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह से है। मुंबई एनआईए की विशेष अदालत द्वारा बुधवार को दिये गये फैसले पर प्रतिक्रिया करते हुए प्रज्ञा ने यहां संवाददाताओं को बताया, ''सत्य तो सत्य होता ही है। जीत हमेशा सत्य और धर्म की ही होती है।
मालेगांव विस्फोट में अपने बेटे को खोने वाले निसार सैयद ने ठाकुर को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग करते हुए पिछले सप्ताह अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अपनी याचिका में उन्होंने यह भी कहा कि ठाकुर की जमानत रद्द करने की मांग करने वाली एक याचिका उच्चतम न्यायालय में लंबित है।

एनआईए के विशेष न्यायाधीश वी एस पडालकर ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि वकील भली-भांति जानते हैं कि यह उचित मंच (याचिका के लिए) नहीं है। न्यायाधीश ने कहा,'...इस अदालत ने जमानत नहीं दी ...गलत मंच चुना गया है।' प्रज्ञा के वकील जे पी मिश्रा ने बुधवार को अदालत से कहा कि उनकी मुवक्किल विचारधारा के लिए और राष्ट्र के हित की खातिर चुनाव लड़ रही हैं।

सैयद ने अपनी याचिका में कहा कि ठाकुर को स्वास्थ्य कारणों से जमानत मिली थी और अगर चिलचिलाती गर्मी में चुनाव लड़ने के लिए उनका स्वास्थ्य ठीक है तो उन्होंने अदालत को गुमराह किया है।