नई दिल्‍ली, बैंकों के समूह द्वारा इमरजेंसी फंड देने से इनकार के बाद आर्थिक संकट से जूझ रही एयरलाइन जेट एयरवेज को मदद के लगभग सारे रास्‍ते बंद हो गए हैं. जेट एयरवेज ने बुधवार की मध्‍यरात्रि से अपनी विमान सेवाएं भी अस्‍थायी तौर पर रोक दी है. इन परिस्थितियों में यह तय हो गया है कि बैंकों के कंट्रोल में आ चुकी प्राइवेट एयरलाइन जेट एयरवेज अब नीलामी की प्रक्रिया से गुजरेगी.

90 के दशक की इस चर्चित एयरलाइन की बोली लगाने के लिए बैंकों ने 4 बोलीदाताओं की पहचान की है. ये चार बोलीदाता- एतिहाद एयरवेज, राष्ट्रीय निवेश कोष एनआईआईएफ, निजी क्षेत्र के टीपीजी कैपिटल और इंडिगो पार्टनर हैं. आज हम इस रिपोर्ट में आपको इन 4 बोलिदाताओं की जानकारी देंगे.

एतिहाद एयरवेज

खाड़ी देश की एयरलाइन एतिहाद एयरवेज का मुख्‍यालय अबुधाबी में है. जुलाई 2003 में शुरू हुई यह एयरलाइन मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और  अमेरिका जैसे देशों तक अपनी सेवाएं देती है. यह एयरवेज संयुक्‍त अरब अमीरात में दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन सेवा है. इस एयरलाइन की जेट एयरवेज में 24 फीसदी पहले से ही हिस्‍सेदारी है.

इंडिगो पार्टनर्स

इंडिगो पार्टनर्स, अमेरिका की प्राइवेट इक्‍विटी फर्म है. इसको अमेरिका की फ्रंटियर एयरलाइन कंट्रोल करती है. इंडिगो पार्टनर्स ने हाल ही में WOW एयर को खरीदने का ऐलान किया है.

टीपीजी कैपिटल

साल 1992 में बनी टीपीजी कैपिटल अमेरिका की निवेश कंपनी है. यह दुनिया की टॉप प्राइवेट इक्‍विटी निवेश फर्म में से एक है. यह फर्म कंज्‍यूमर, रिटेल, मीडिया और टेली-कम्‍युनिकेशन के अलावा हेल्‍थकेयर जैसे सेग्‍मेंट में निवेश करती है.   

एनआईआईएफ

नेशनल इन्‍वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) को दिसंबर 2015 में भारत के महत्वपूर्ण सेक्टर में फंडिंग करने के लिए बनाया गया था. संस्‍था की वेबसाइट के मुताबिक तीन अलग-अलग फंडों में 3 बिलियन डॉलर से अधिक कैपिटल कमिटमेंट का मैनेजमेंट किया जाता है.

बता दें कि इस महीने की शुरुआत में कर्जदाता बैंकों के समूह की ओर से एसबीआई कैप ने जेट एयरवेज की 32.1 से लेकर 75 फीसदी तक हिस्सेदारी की बिक्री के लिये बोलियां आमंत्रित की थी. बोलियां 8 अप्रैल से 12 अप्रैल तक आमंत्रित की गई थीं.

क्‍या कहते हैं कर्जदाता   

जेट एयरवेज के कर्जदाताओं का कहना है कि इस हिस्सेदारी की बिक्री के लिए बोली प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूरी होने की उम्मीद है. कर्जदाताओं की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘‘काफी विचार-विमर्श के बाद कर्जदाताओं ने तय किया कि जेट एयरवेज के अस्तित्व को बचाने का सबसे अच्छा तरीका संभावित निवेशकों से पक्की बोलियां प्राप्त करना है. इसके लिए बोलिदाताओं ने ईओआई (रुचि पत्र) जमा कराया है.’’