भोपाल । राज्य उपभोक्ता आयोग में इन दिनों उपभोक्ताओं को न्याय नहीं मिल रहा है, अगर मिल रही है तारीख पर तारीख। कुछ मामलों में विपक्षी पार्टी नहीं आती तो कुछ में वकील नहीं आते। राज्य उपभोक्ता आयोग में कई उपभोक्ताओं के सालों के मामले लंबित पड़े हैं। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में अपील दायर करते हैं तो जरूरी नहीं कि आपके मामले की सुनवाई जल्दी हो और आपको 90 दिनों में न्याय मिल जाए, क्योंकि आयोग में सुनवाई के लिए वर्ष 2020 तक की तारीख दी जा रही है। कई मामलों में नवंबर 2019 और कुछ में फरवरी 2020 तक की तारीख दी गई है, जबकि उपभोक्ता अधिकार सरंक्षण अधिनियम के अनुसार एक प्रकरण की सुनवाई 90 दिन में और अपील में चल रहे प्रकरण की सुनवाई छह माह में पूरी होना चाहिए। आयोग में अभी 10 हजार से भी ज्यादा मामले पेंडिंग है। वहीं, सभी जिला उपभोक्ता फोरम में 22 हजार मामले लंबित है। गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में उपभोक्ताओं को 90 दिन में न्याय देने के लिए हर जिले में सर्किट बेंच लगती है, लेकिन प्रदेश में ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं है।
     देवास से आए अपीलार्थी ने बताया कि विपक्षी पार्टी के न आने से हर बार अगली तारीख प्रदान कर दी जाती है। कई बार तारीख आगे बढ़ाने से परेशान हो चुके हैं। आयोग में लंबित अपीलों का अंबार लगता जा रहा है। हालात यह हैं कि आयोग के समक्ष दायर की जाने वाली अपीलों में उपभोक्ता को नवंबर 2019 तक की पेशी तारीख प्रदान की जा रही है।हैरत की बात तो यह है कि लंबित अपीलों में जहां 9 साल पहले यानी कि वर्ष 2010 में दायर की गई अपील भी शामिल है। आयोग में 1998 के मामले भी पेंडिंग है। वकीलों का कहना है कि मामले की सुनवाई में बेंच को कम से कम एक घंटा लगता है। बेंच खत्म होने के बाद अध्यक्ष व सदस्य को प्रकरण में हुई कार्रवाई को नोटशीट पर लाना होता है इसकी वजह से एक दिन में अधिक से अधिक 5-6 प्रकरणों पर सुनवाई हो पाती है। इस समस्या के हल के लिए पुराने मामलों की सुनवाई तेजी से करनी होगी। इसके लिए नए व पुराने मामलों के लिए अलग-अलग बेंच लगनी चाहिए। इस बारे में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के रजिस्ट्रार राजीव एम आप्टे का कहना है कि सभी जिला उपभोक्ता फोरमों में सदस्यों की कमी है। कई फोरमों में कोरम पूरा न होने के कारण बेंच नहीं लग पाती है। जल्द ही पेंडेंसी को खत्म किया जाएगा।