भोपाल। देशभर के जैन धर्मावलम्बियों के आस्था और श्रद्धा का केन्द्र श्री ज्ञानोदय तीर्थधाम के स्थापना दिवस के दूसरे दिन पंचमेरु मण्डल विधान का आयोजन गया। आज प्रात: भगवान जिनेन्द्र की प्रतिमाओं के अभिषेक और पूजा-अर्चना के साथ ज्ञानोदय तीर्थधाम में भक्तिपूर्वक विधान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पंचमेरु जिसमें  सुदर्शन मेरु अशोक कुमार, विजय मेरु डॉ. महेश शास्त्री, अचल मेरु राजकुमार जैन, मंदर मेरु श्रीमती सरोज जैन एवं विद्युत मेरु उमेशचन्द्र द्वारा स्थापना की गई एवं कलश स्थापना अष्ट प्रतिहार्य की स्थापना अन्य धार्मिक अनुष्ठान मंत्रोच्चार के साथ पं. जतीश भाई दिल्ली के निर्देशन में हुए।  तत्पश्चात उल्लासपूर्वक श्रद्धालुओं ने इन्द्र-इन्द्राणियों का वेष धारण कर पंचमेरु के 80 जिनालयों में विराजमान भगवन्तों के अनन्त गुणों की वंदना की एवं माड़ने पर अर्घ्य समर्पित किये। कार्यक्रम संयोजक अरुण वर्धमान ने बताया कि आशीष वचन में मुख्य विद्वान पं. रजनीभाई दोषी एवं श्रेणिक जी द्वारा जैन धर्म के सिद्धांतों को विस्तार से बताते हुए नियमसार ग्रंथ की वाचना की उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में पाप और पुण्य उसके अभिप्राय के अनुसार होते हैं यदि अभिप्राय निर्मल है तो पुण्य का बंध होता है और यदि अभिप्राय अशुभ है तो पाप कर्मों का बंध होता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अष्ट देवियों द्वारा तत्वचर्चा की गई।