लोकसभा चुनाव की गहमा-गहमी के बीच हर तरफ सवाल दागे जा रहे हैं। विपक्ष सरकार से सवाल पूछ रहा है। सत्तादल विपक्ष की भूमिका और मंशा पर सवाल उठा रहा है। सवालों की इस भीड़ में अपने-अपने ढंग से जवाब दिए जा रहे हैं। उप्र में तमाम मुद्दों के बीच कहीं जाति के दांव चले जा रहे हैं तो कहीं ताबड़तोड़ दल-बदल हो रहा है। सपा-बसपा-रालोद का गठबंधन भाजपा को घेर रहा है तो भाजपा भी अपना दल और निषाद पार्टी जैसे दलों को जोड़ कर मुकाबले को तैयार है। कांग्रेस ने अलग मोर्चा खोल रखा है और वह खुद को भाजपा का विकल्प बता रही है। ऐसे में दो साल से उप्र की भाजपा सरकार का नेतृत्व कर रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उप्र में 73 प्लस का लक्ष्य कैसे हासिल करेंगे? वह किन मुद्दों को लेकर जनता के पास जा रहे हैं? चुनाव आयोग के नोटिस पर उनका क्या कहना है? गुरुवार को चुनावी रैलियों के बीच विशेष विमान में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ लखनऊ के कार्यकारी संपादक केके उपाध्याय से बातचीत करते हुए ऐसे तमाम सवालों के जवाब दिए। पेश हैं इस बातचीत के मुख्य अंश.....

भाजपा किन मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है?

मोदी सरकार ने पांच साल में अभूतपूर्व काम किए हैं। पहली बार बिना किसी भेदभाव और भ्रष्टाचार के योजनाएं लागू हुई हैं। सबका विकास-सबको सुरक्षा लेकिन तुष्टीकरण किसी का नहीं। इस मूलमंत्र के साथ मोदी सरकार के काम लेकर हम जनता के बीच जा रहे हैं। 

कांग्रेस पूछ रही है कि आपने गरीबों-किसानों के लिए क्या किया है?

राहुल गांधी को वास्तविकता की जानकारी नहीं है। आजादी के 55 वर्षों में कांग्रेस जो नहीं कर पाई, वह मोदी सरकार ने 55 महीनों में कर दिखाया।.

उनमें से कुछ मुख्य काम गिना सकते हैं?

जरूर। आप गिनते-गिनते थक जाएंगे। मोदी सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने किसानों को सुरक्षा कवच दिया है। यह प्राकृतिक आपदाओं में किसानों का संबल है। कृषि सिंचाई योजना ने उत्पादन बढ़ा कर किसानों की आमदनी दूनी करने में रोल अदा किया। स्वायल हेल्थ कार्ड से उत्पादकता बढ़ी है। कांग्रेस क्या आरोप लगा रही है? स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट 2006 से इंतजार कर रही थी। कांग्रेस ने उसे लागू नहीं किया। आजादी के बाद से किसान मांग कर रहे थे कि उन्हें फसल की लागत का कम से कम डेढ़ गुना मूल्य मिले। मोदी सरकार ने यह किया। 2014 में गेहूं का समर्थन मूल्य 1260 रुपये था। आज यह 1860 रुपये है। केवल 5 साल में एक कुंतल गेहूं पर किसानों को अतिरिक्त 600 रुपये मिल रहे हैं।.

गठबंधन भी किसानों को लेकर भाजपा पर हमलावर है?

उप्र में हमसे पहले 15 वर्ष तक सपा और बसपा की सरकारें थीं। उन्होंने कभी फसलों की खरीद का इंतजाम नहीं किया। दोनों दलों की सरकारें धान, गेहूं, तिलहन, दलहन, आलू कुछ नहीं खरीदती थीं। भाजपा सरकार ने दो साल में उप्र में रिकॉर्ड फसल खरीद की है। हमने सरकार बनाने के पहले साल में 37 लाख और दूसरे साल 53 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा। सारा पैसा सीधे किसानों के खाते में भेजा। इसी तरह हमने पहले साल 42 लाख टन धान खरीदा, दूसरे साल 48 लाख टन। पहली बार दलहन, तिलहन, आलू के समर्थन मूल्य हमने दिए। पहली बार प्रदेश में मक्का की खरीद हुई। जिन्होंने किसानों को बदहाल बनाया, अब वही सवाल पूछ रहे हैं।.

कांग्रेस कह रही है, मोदी सरकार ने गरीबों-के लिए कुछ नहीं किया। कांग्रेस गरीबों को 72 हजार सालाना देने की योजना लाएगी। 

कांग्रेस का घोषणा पत्र खुद उनके 55 वर्षों के शासनकाल की नाकामी का दस्तावेज है। इसमें कई खतरनाक बातें कही गई हैं। कांग्रेस के घोषणापत्र की बातें अगर दुर्भाग्य से लागू हो जाएं तो अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो जाएगी। यह घोषणापत्र तो किसी खतरनाक साजिश का हिस्सा लगता है।

गठबंधन के नेता पूछ रहे हैं कि गन्ना किसानों का हजारों करोड़ बकाया कब मिलेगा?

सपा और बसपा की सरकारों ने अपने पांच-पांच साल के कार्यकाल में 55 हजार करोड़ रुपए बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान किया था। भाजपा सरकार ने दो साल में 61 हजार करोड़ का भुगतान किया। गन्ना किसानों का सबसे बड़ा नुकसान सपा, बसपा और रालोद की सरकारों ने ही किया। हमने जो 61 हजार करोड़ रुपये बकाया भुगतान किया है, उसमें सन् 2012 से 2017 तक का बकाया भी शामिल है। यह तो उन्हीं के कार्यकाल का था। हम इस सीजन में भी 13 हजार करोड़ दे चुके। अभी 8 हजार करोड़ का बकाया है। जो जल्द मिलेगा। 

गठबंधन भी किसानों को लेकर भाजपा पर हमलावर है?

उप्र में हमसे पहले 15 वर्ष तक सपा और बसपा की सरकारें थीं। उन्होंने कभी फसलों की खरीद का इंतजाम नहीं किया। दोनों दलों की सरकारें धान, गेहूं, तिलहन, दलहन, आलू कुछ नहीं खरीदती थीं। भाजपा सरकार ने दो साल में उप्र में रिकॉर्ड फसल खरीद की है। हमने सरकार बनाने के पहले साल में 37 लाख और दूसरे साल 53 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा। सारा पैसा सीधे किसानों के खाते में भेजा। इसी तरह हमने पहले साल 42 लाख टन धान खरीदा, दूसरे साल 48 लाख टन। पहली बार दलहन, तिलहन, आलू के समर्थन मूल्य हमने दिए। पहली बार प्रदेश में मक्का की खरीद हुई। जिन्होंने किसानों को बदहाल बनाया, अब वही सवाल पूछ रहे हैं।.

कांग्रेस कह रही है, मोदी सरकार ने गरीबों-के लिए कुछ नहीं किया। कांग्रेस गरीबों को 72 हजार सालाना देने की योजना लाएगी। 

कांग्रेस का घोषणा पत्र खुद उनके 55 वर्षों के शासनकाल की नाकामी का दस्तावेज है। इसमें कई खतरनाक बातें कही गई हैं। कांग्रेस के घोषणापत्र की बातें अगर दुर्भाग्य से लागू हो जाएं तो अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो जाएगी। यह घोषणापत्र तो किसी खतरनाक साजिश का हिस्सा लगता है।

गठबंधन के नेता पूछ रहे हैं कि गन्ना किसानों का हजारों करोड़ बकाया कब मिलेगा?

सपा और बसपा की सरकारों ने अपने पांच-पांच साल के कार्यकाल में 55 हजार करोड़ रुपए बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान किया था। भाजपा सरकार ने दो साल में 61 हजार करोड़ का भुगतान किया। गन्ना किसानों का सबसे बड़ा नुकसान सपा, बसपा और रालोद की सरकारों ने ही किया। हमने जो 61 हजार करोड़ रुपये बकाया भुगतान किया है, उसमें सन् 2012 से 2017 तक का बकाया भी शामिल है। यह तो उन्हीं के कार्यकाल का था। हम इस सीजन में भी 13 हजार करोड़ दे चुके। अभी 8 हजार करोड़ का बकाया है। जो जल्द मिलेगा। 
अब भर्ती के मामले कोर्ट में क्यों फंसेे हैं?

एक परीक्षा में कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में फ्लूड लगा था। उन्हें प्रक्रिया से बाहर किया गया। वे लोग कोर्ट गए। कोर्ट ने आदेश दिया कि उन्हें भी शामिल करें। अभी शिक्षकों की 69 हजार शिक्षक भर्ती होनी है। पहले बीटीसी और टीईटी को ही शामिल करना था। बाद में नियम बना कि बीएड और टीईटी को भी शामिल करें। पहली परीक्षा में एक लाख युवाओं ने आवेदन किया था। 40 हजार ही पास हुए। दूसरी नियुक्ति निकाली तो कटऑफ बढ़ा दिया। विरोध में कुछ लोग हाईकोर्ट चले गए। इस बार आवेदकों की संख्या 4 लाख हो गई है। इंटरव्यू होने नहीं हैं। मेरिट से भर्ती होगी। कट ऑफ को लेकर मामला कोर्ट चला गया है। जब भर्तियां मेरिट से ही होनी है तो कट ऑफ कुछ भी रहे।.

पिछले दिनों अखिलेश यादव ने ट्वीट किया कि उप्र में सड़कों की हालत खराब है।

उप्र में सड़कों की हालत सपा सरकार की तुलना में बहुत अच्छी है। सपा सरकार में सड़कों में लूट थी। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे 341 किलोमीटर लंबा बनना है। सपा सरकार ने बिना जमीन खरीदे टेंडर निकाला। 15,200 करोड़ लागत रखी। मई 2017 में मैंने पूछा तो पता चला कि अभी तो जमीन ही नहीं खरीदी गई। मैंने पूछा- टेंडर कैसे हुआ? आखिरकार टेंडर निरस्त कर पहले एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन खरीदी। 96 फीसदी जमीन मिलने के बाद टेंडर किया।.

उनका कहना है कि हर प्रोजेक्ट साफ-सुथरा था। भ्रष्टाचार का आरोप बेबुनियाद है।

मैं आंकड़ों के साथ बता रहा हूं। अखिलेश सरकार में खनन से 1400 करोड़ मिलते थे। अब सरकार को 4200 करोड़ मिल रहे हैं। तब मंडी शुल्क 600 करोड़ आता था। अब यह 1800 करोड़ मिल रहा है। तब वैट 49,000 करोड़ मिलता था। .

अब यह जीएसटी के रूप में 75,000 करोड़ मिल रहा है। तब आबकारी से 13,000 करोड़ मिलते थे। अब यह रकम 32,000 करोड़ है। आखिर यह पैसा कहां जा रहा था। झूठ छिपाने को वे विधानमंडल कार्रवाई बाधित करते हैं। .
उप्र में तीन महत्वपूर्ण एक्सप्रेस-वे बन रहे हैं। यह कब तक पूरे हो जाएंगे?

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे जून 2020 तक बन जाएगा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे 2022 से पहले बन जाएगा। गंगा एक्सप्रेस-वे का काम इस साल अंत तक शुरू कर देंगे। .

डिफेंस कॉरीडोर की क्या प्रगति है?

इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है। 1000 छोटी यूनिट आ रही हैं। हम इसे बुंदेलखंड से शुरू कर रहे हैं। एक्सप्रेस-वे और डिफेंस कॉरीडोर से बुंदेलखंड तेजी से तरक्की करेगा। रोजगार पैदा होगा। झांसी से दिल्ली का सफर 3.30 घंटे का रह जाएगा।.

गठबंधन का दावा है कि भाजपा उससे टक्कर नहीं ले पाएगी। आप 74 प्लस का लक्ष्य कैसे हासिल करेंगे?.

गठबंधन फेल है। वहां भगदड़ मची है।.

पुलिस के एनकाउंटर अब कम हो गए हैं? 

अपराध पर हमारी जीरो टालरेंस की नीति है। जब भाजपा उप्र में सत्ता में आई, यहां अराजकता थी। अपराधी बेखौफ थे। इसीलिए उस वक्त एनकाउंटर ज्यादा हुए। अब समय के साथ परिवर्तन हुए। अपराधी या तो जेल चले गए या मारे गए। जो बचे उन्होंने प्रदेश छोड़ दिया। अब भी कोई पुलिस पर गोली चलाएगा तो पुलिस हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठेगी।.

भारतीय सेना को मोदी की सेना कहने पर चुनाव आयोग ने आपको नोटिस दिया है।

हां। मैंने आयोग को जवाब भी भेज दिया है। जब हम बातचीत में ‘हमारी सेना' कहते हैं तो सेना मेरी नहीं हो जाती। उसका आशय मेरे देश की सेना से होता है। मोदी पीएम हैं। पहले भी पीएम होते थे पर उनकी सरकारें अनिर्णय से घिरी थीं। मोदी सरकार ने निर्णय लिए। इससे विश्व में भारत का मान बढ़ा है। 

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, कांग्रेस के सक्रिय होने या प्रियंका वाड्रा के तेज होने का कोई असर नहीं है। हमारे वोट बैंक या सीटों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। प्रियंका के आने का सबसे ज्यादा खामियाजा राहुल गांधी को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें अमेठी छोड़कर वायनाड भागना पड़ा।.