भोपाल।  राजधानी के समीप प्राचीन अतिशय क्षेत्र कुराना में आज जैन धर्मावलंबियों का सैलाब उमड़ रहा था। रंगपंचमी के अवसर पर समाज के बंधु आज श्रद्धाभक्ति के रंग में रंगे नजर आ रहे थे। मौका था मुनिश्री अजित सागर महाराज, ऐलक दयासागर महाराज, ऐलक विवेकानंद सागर महाराज के सानिध्य में वार्षिक उत्सव के अवसर पर भगवान आदिनाथ की अति प्राचीन, मनोहारी, खडगासन प्रतिमा का महामत्सकाभिषेक का केसरिया वस्त्र धारण कर मन में श्रद्धा भक्ति और आस्था संजोये श्रद्धालुओं में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का अभिषेक करने के लिये श्रद्धालु उतावले हो रहे थे। स्वर्ण कलशों से अनेकों श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ अभिषेक कर सम्पूर्ण जगत में प्रेम, शांति, सद्भाव की कामना के साथ प्रभु के मस्तक पर मंत्रोचारित शांतिधारा की। तत्पश्चात मुनिसंघ के सानिध्य में तीर्थ परिसर में श्री शांतिनाथ विधान के अर्घ्य समर्पित किये गये। दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रमोद हिमांशु एवं अन्य मंदिर समितियों के अध्यक्षों द्वारा मुनिसंघ को करकमलों में शास्त्र भेंट किये गये। दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी अंशुल जैन ने बताया कि राजधानी के जिनालयों में संचालित पाठशाला के बच्चों द्वारा अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी गई। ट्रस्ट अध्यक्ष हिमांशु द्वारा क्षेत्र में किये जा रहे अनेक विकास कार्यों की जानकारी देते हुये आगामी समय की योजनाओं के संबंध में विस्तार से बताया। मुनिश्री अजित सागर महाराज ने कहा कि तीर्थ हमारे देश की संस्कृति के माथे के तिलक होते हैं। इसमें प्राचीन तीर्थ तो देश की वह धरोहर है जिनकी कीमत तो केवल श्रद्धालुओं द्वारा तीर्थ वंदना की जाने वाले अनन्तानकहा कि तीर्थ हमारे देश की संस्कृति के माथे के तिलक होते हैं। इसमें प्राचीन तीर्थ तो देश की वह धरोहर है जिनकी कीमत तो केवल श्रद्धालुओं द्वारा तीर्थ वंदना की जाने वाले अनन्तानंत श्रद्धाभक्ति के भावों से पहचाना जा सकता है। मुनिश्री ने कहा कि अंतरंग भावों से की गई भक्ति अध्यात्मक और ध्यान के रंगों से सराबोर कर देती है।  
    मुनिश्री ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी के हम सभी अनुयायी हैं। उनके द्वारा बताये गये जियो और जीने दो एवं विश्व में शांति अहिंसा से ही होगी इसे हम नारों तक सीमित नहीं रखें। आवश्यकता है हम भी अहिंसा के रंग में रंगकर अपने दैनिक जीवन के साथ-साथ आचरण में भी अहिंसा का अलख जगायें। अगर हमारे परिणामों में, आचरण में, अहिंसा के साथ सरलता, निर्मलता विद्वमान हो जायेगी तो हमारी तीर्थ वंदना और प्रभु की भक्ति करना सार्थक है। प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि शाम को मुनिसंघ पदविहार करते हुये महावीर मेडिकल कालेज पहुंचे यहां मेडिकल कालेज के सचिव डॉ. राजेश जैन एवं अन्य चिकित्सकों और संस्था के कर्मचारियों ने मुनिसंघ का पादप्रछालन कर अगवानी की। आज  26 मार्च को मुनिसंघ के सानिध्य में मेडिकल कालेज परिसर में स्थापित श्री महावीर जिनालय में श्री महावीर विधान सम्पन्न होगा।