पिछले तीस साल में हुए लोकसभा के चुनावों के आंकड़ों पर गौर करें तो पता लगेगा कि पिछड़ों और दलितों की पार्टी होने का दावा करने वाली बहुजन समाज पार्टी यानि बीएसपी का प्रदर्शऩ रिजर्व सीटों पर बहुत खराब रहा है. वो भी खासकर उस प्रदेश में जो उसकी सबसे बड़ी ताकत है. ये प्रदेश यूपी है. ये 17 रिजर्व सीटें हैं लेकिन इन पर लोकसभा चुनावों में बीएसपी ने सबसे खराब प्रदर्शन किया है.

बसपा का गठन कांशीराम द्वारा 14 अप्रैल 1984 में किया गया था. 1989 मेंपार्टी ने पहली बार 245 सीटों पर चुनाव लड़ा. जिसमें तीन पर उसने जीत हासिल की.

बीएसपी ने हमेशा से अनुूसूचित जाति, खासकर दलितों के बीच अपने मजबूत बेस का दावा किया है. पार्टी ने गठन के बाद से लगातार ये कहा है कि वो समाज से इस वर्ग को रिप्रजेंट करती रही है. हालांकि पिछले कुछ चुनावों में बीएसपी ने अपनी सोशल इंजीनियरिंग में कुछ बदलाव भी किया है.

लेकिन अगर यूपी की रिजर्व संसदीय सीटों की बात करें तो इन पर बीएसपी का प्रदर्शन कभी बहुत चमकदार नहीं रहा है. यूपी में कुल 80 सीटों में 17 सीटें एससी के लिए रिजर्व हैं, जो देश की सबसे ज्यादा सुरक्षित सीटें हैं.

आंकड़े क्या कहते हैं

बीएसपी ने 2004 में रिजर्व में केवल पांच सीटें जीतीं, वर्ष 2009 में उसे केवल एक रिजर्व सीट पर जीत मिली. जबकि 2009 के चुनाव में बीएसपी को 21सीटें मिलीं थीं. अगर हम इन 17 रिजर्व सीटों की बात 1989 से लेकर 2014 चुनाव तक करें तो ये 136 सीटें बैठती हैं. इनमें बीएसपी को केवल 16 सीटों पर जीत मिली है.