वॉशिंगटन। न्यूयॉर्क की पहचान रही क्रिसलर बिल्डिंग की डील हो गई है। वाल स्ट्रीट जर्नल की खबर के अनुसार, इसके मालिक इसे 15 करोड़ डॉलर से अधिकर में बेचने के लिए राजी हो गए हैं।

मिडटाउन मैनहट्टन में टावर की बिक्री की जो कीमत लगाई गई है, वह अमीरात की निवेश फर्म मुबाडाला के लिए एक बड़े नुकसान का संकेत है। इस फर्म ने साल 2008 में इमारत की 90 फीसद हिस्सेदारी के लिए 80 करोड़ डॉलर का भुगतान किया था।

साल 1997 में रियल एस्टेट समूह टिशमैन स्पीयर ने 210-250 मिलियन डॉलर में इमारत खरीदी थी और इसकी 10 फीसद हिस्सेदारी अपने पास बरकरार रखी थी। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि भवन के मालिक इसके नीचे की जमीन के मालिक नहीं हैं और सालाना इसके किराये का भुगतान करते हैं। साल 2018 में यह राशि 70.75 लाख डॉलर से बढ़कर 3.2 करोड़ डॉलर हो गई थी और 2028 में फिर यह राशि बढ़कर 4.1 करोड़ डॉलर हो जाएगी।

दलालों के हवाले से समाचार पत्र ने लिखा कि बिल्डिंग के राजस्व का बड़ा हिस्सा इस फीस में चला जाता है। इमारत में 37 हजार 160 वर्ग मीटर जगह खाली पड़ी है। क्रिसलर इमारत को साल 1930 में खोला गया था। यह 319 मीटर ऊंची बिल्डिंग है। उस वक्त यह दुनिया की सबसे ऊंची इमारत थी। मगर, इसके बनने के 11 महीनों के बाद ही मैनहट्टन में बनी एम्पायर स्टेट बिल्डिंग ने क्रिसलर से यह खिताब छीन लिया था। 
यह इमारत कार निर्माता वाल्टर क्रिसलर का निजी प्रोजेक्ट था। उन्हीं के नाम पर इस इमारत का नाम रखा गया था। मगर, इसे ऑटो बिजनेस से अलग रखा गया।