देश के सबसे बड़े कानूनी विवाद- अयोध्या भूमि पर मालिकाना हक को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की इजाजत दे दी है. अयोध्या केस के निपटाने के लिए मध्यस्थों की जो कमेटी बनी है उनमें जस्टिस खलीफुल्ला, वकील श्रीराम पंचू और आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर शामिल हैं. इस कमेटी के चेयरमैन जस्टिस खलीफुल्ला होंगे. इस कमेटी को 8 हफ्तों में अपनी रिपोर्ट देनी होगी. इस कमेटी के गठन होते ही इस विवाद से जुड़े कई पक्षकारों ने आशंका जाहिर की है.

हिन्दू महासभा के वकील विष्णु शंकर जैन ने अपनी शुरुआती प्रतिक्रिया में कहा है कि उन्हें नहीं लगता है कि मध्यस्थता कर इस केस को सुलझाया जा सकता है. उन्होंने कहा, "चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रक्रिया तय की है इसलिए हम इंतजार कर रहे हैं." निर्मोही अखाड़ा के महंत सीताराम दास ने कहा कि वे श्रीश्री रविशंकर की मध्यस्थता का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे इस मसले का राजनीतिक नहीं बल्कि कानूनी समाधान चाहते हैं. उन्होंने कहा कि वे इस मामले के समाधान के लिए किसी संवैधानिक व्यक्ति को चाहते थे, अगर रविशंकर इस मामले में संवैधानिक रूप से आगे बढ़ेंगे तब तो ठीक है. उन्होंने कहा कि कल कोई ये ना कह दे कि इस मामले में राजनीति हो रही है, क्योंकि इस मामले में हम राजनीति से दूर रहना चाहते हैं.


वहीं अयोध्या में मौजूद साधुओं ने भी इस मध्यस्थता पैनल पर आपत्ति जताई है. अयोध्या में आजतक के साथ बातचीत में हिन्दू पक्षकार ने कहा कि कुल मिलाकर मामले को एक बार फिर से लटकाने का काम किया गया है. उन्होंने धर्मगुरु श्रीश्री रविशंकर के नाम को खारिज करते हुए कहा कि क्या अयोध्या के संत इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के काबिल नहीं थे. उन्होंने कहा कि रविशंकर इस मामले में मध्यस्थता करने वाले होते कौन हैं. अयोध्या के संतों ने कहा कि समझौता पक्षकारों को करना है, लेकिन इस पैनल में पक्षकार हैं ही नहीं. संतों ने कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि रविशंकर को यहां पर कोई सुनने वाला नहीं है.

मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि कोर्ट ने मध्यस्थता की पहल कर अच्छा कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि इस मामले में सभी पक्षों को कोर्ट का फैसला मानना होगा.

वहीं अयोध्या मामले के मुद्दई इकबाल अंसारी ने कहा कि वह मध्यस्थता पर सहयोग करने को तैयार हैं, अगर कोर्ट ने कहा है तो वे इस दिशा में काम करेंगे. इकबाल अंसारी ने कहा कि इस पैनल के गठन होने के बाद उम्मीदें बढ़ गई है अगर इस पर बात बन जाती है बेहतर है.

AIMPLB के सदस्य और संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा कि उन्होंने पहले ही कह दिया है कि वे मध्यस्थता में सहयोग करेंगे. उन्होंने कहा, "अब हमें जो कुछ भी कहना है हम मध्यस्थता कमेटी को ही बताएंगे."

यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कुछ नहीं बोलेंगे, इस मुद्दे का विगत में भी हल खोजने की कोशिश की गई है, उन्होंने कहा कि रामभक्त वहां पर मंदिर का निर्माण चाहते हैं.

विश्व हिन्दू प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा है मध्यस्थता का पहले भी क्या हश्र हुआ है ये लोग पहले भी देख चुके हैं. वार्ता का कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने कि मंदिर के मामले में उन्हें किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं है. उन्होंने आजतक से बातचीत में कहा कि विवादित जमीन का ना तो कोई बंटवारा और ना ही हस्तांतरण उन्हें स्वीकार है.