कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लोकसभा चुनाव के लिए सभी सीटों पर कोआर्डिनेटरों की तैनाती कर दी है। मैदान में उतारने से पहले इन कोआर्डिनेटरों को कम्प्यूटर से लेकर चुनाव प्रबन्धन आदि की ट्रेनिंग दी गई है। अमेठी, रायबरेली की तर्ज पर नियुक्त पार्टी के ये कोआर्डिनेटर अपने-अपने क्षेत्रों में चुनाव और पार्टी नेताओं से जुड़ी हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर रखेंगे। मंगलवार को अपने-अपने क्षेत्रों में चले जाएंगे और चुनाव खत्म होने तक वहीं कैम्प करेंगे। 

मध्य प्रदेश में हो चुका है प्रयोग

अभी तक यूपी में रायबरेली और अमेठी में कोआर्डिनेटरों की नियुक्ति होती रही है। मध्य प्रदेश के हालिया विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने यह प्रयोग किया था, जो सफल रहा था। पार्टी के मुताबिक राजस्थान में कोआर्डिनेटरों की नियुक्ति नहीं हुई थी और चुनाव के बाद महसूस किया गया कि अगर ऐसा किया होता तो 25-30 सीटों का इजाफा होता। 

युवाओं को तरजीह

कोआर्डिनेटरों की तैनाती में युवाओं और एनएसयूआई व यूथ कांग्रेस में रहे नेताओं को तरजीह दी गई है। अधिकांश कोआर्डिनेटर 40 साल के अन्दर हैं। इन कोआर्डिनेटरों के साथ सहायक भी लगाए गए हैं। मध्य प्रदेश में लगायी गई टीम के लोग भी यहां कोआर्डिनेटर बनाये गए हैं। सभी कोआर्डिनेटरों को प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिन्धिया के साथ लगाए गए राष्ट्रीय सचिवों ने बकायदा ट्रेनिंग दी है। 


हर छोटी-बड़ी घटना पर रखेंगे निगाह

कोआर्डिनेटर सार्वजनिक तौर पर कार्यक्रमों का आयोजन नहीं करेंगे। चुपचाप काम करेंगे। चुनाव के स्थानीय समीकरण, मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में कौन प्रत्याशी उपयुक्त होगा, बूथ स्तर तक संगठन की स्थिति, कौन नेता क्षेत्र में रह कर पार्टी का काम कर रहा है और कौन लखनऊ, दिल्ली में बड़े नेताओं की परिक्रमा कर रहा है-जैसी छोटी-बड़ी घटनाओं पर निगाह रखेंगे।