नई दिल्लीः भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के बलिदान दिवस पर आयोजित 'समर्पण दिवस' कार्यक्रम में  कहा कि 'पार्टी का काम करते करते आज ही के दिन पंडित जी ने अपना बलिदान दिया था. भाजपा इस दिन को समर्पण दिवस के रूप में मनाती है. आज दीनदयाल जी का बलिदान दिन है. देश में आजादी के बाद बहुत सारे लोगों को ऐसा लगता था कि अगर लोकतंत्र को सफल बनाना है तो पश्चिमी विचारों से दूर अपने देश की विचार वाली एक पार्टी का निर्माण किया जाना चाहिए. ऐसे में दीनदयाल जी ने एक ऐसी पार्टी की परिकल्पना की, जिस पार्टी का आधार नेता न हों, बल्कि कार्यकर्ता और संगठन हों.'
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगे कहा कि 'दीनदयाल ने पार्टी का जो बीज बोया था, वो आज एक विशाल वट वृक्ष के रूप में सामने है. खुद को प्रसिद्धि से दूर रखकर संगठन के माध्यम से चुनाव कराने का जो मंत्र दीनदयाल ने दिया था, वो आज भी हमारे लिए प्रेरणास्रोत है. हमारे ध्येय को प्राप्त करने का साधन भाजपा का संगठन है. हम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और गरीब कल्याण के ध्येय को लेकर आगे बढ़े हैं.' उन्होंने आगे कहा कि 'हम विचारधारा की स्वीकृति और संगठन की शक्ति के आधार पर चुनाव जीतने का विचार रखते हैं न कि ओछी राजनीति करके.'
उन्होंने आगे कहा कि 'सांस्कृति राष्ट्रवाद और गरीबी को हटाना ये हमारे दो ध्येय है. ऐसे में अगर हमें पार्टी को शुद्ध रखना है तो बिल्डर उद्योगपतियों से दूर रहना होगा. पूरा चुनाव पार्टी कार्यकर्ताओं के पैसे से लड़ लिया जाए ऐसा संभव नही है. ये एक सार्वजनिक बहस का विषय है. मोदी जी ने काले धन पर नकेल कसी है कि कोई भी पार्टी 2000 रुपये कैश में न ले सके. सात राज्य ऐसे हैं जिन्होंने कार्यकर्ताओं के सहयोग से इतना पैसा इकट्टा कर लिया है कि सारे कार्यालय का खर्च निकल जाता है. इतना पैसा होना चाहिए कि कार्यालय का खर्चा फिक्स डिपाज़िट के ब्याज से निकल जाये. हमारा लक्ष्य है कि हर बूथ से कम से कम एक या दो कार्यकर्ता मोदी एप के माध्यम से 1000 रुपये पार्टी को अनुदान दे या चैक के माध्यम से दे. '
सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'मैं मानता हूं कि न केवल बीजेपी बल्कि सभी राजनीतिक पार्टियों को इसका अनुसरण करने की जरूरत है. देश में आज भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बहुत बड़ी लड़ाई चल रही है. ये नकेल कसने का जो अभियान चलाया है कानूनों को इतना कड़ा कर दिया है कि अगर वो कानून के चौराहे से निकल भी जाए तो वो बच नही सकता. जो विदेश भी चला गया उसको पकड़कर लाया जाएगा. लोग देश से इसलिए भाग रहे हैं क्योंकि उनको जेल में डाला जा रहा है. नीरव मोदी और माल्या को क्यों भागना पड़ा, क्योंकि चौकीदार सख्त है. पहले लोग नहीं भागते थे क्योंकि उनके भागीदार यहां मौजूद थे.'