जबलपुर। नर्मदा जयंती के पूर्व लगातार एक सप्ताह से माँ नर्मदा का जलस्तर लगातार घटने से जहां एक तरफ चौई पैâली हुई नजर आ रही है वहीं दूसरी तरफ गंदे नाले-नालियों का मैला पानी माँ नर्मदा के आंचल को प्रदूषित करता दिखाई दे रहा है। शनिवार को प्रातः साकेतधाम के अधिष्ठाता स्वामी गिरिशानंद सरस्वती महाराज के साथ संतों ने म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ नर्मदा तट का दौरा कर बरगी बांध से जल रोकने के कारण उत्पन्न समस्या पर चिंता व्यक्त की। इस अवसर पर स्वामी गिरिशानंद सरस्वती जी ने बताया कि सिद्धघाट में झरने के रूप में नाली का पानी नर्मदा में समा रहा है, इसी तरह दरोगा घाट में भी फिल्ट्रेशन प्लांट के जल के साथ ही प्रदूषित जल भी काले और बदबूदार जल के रूप में नर्मदा में मिल रहा है। सिद्धघाट, उमाघाट से लेकर नर्मदा मंदिर तक इस कदर चौई पैâली है कि नाव का चलना भी मुश्किल हो रहा है। स्वामी गिरिशानंद ने प्रशासन को इस बावत बताया कि बरगी बांध से नियमित जल को छोड़ा जाये जिससे नर्मदा में अविरल प्रवाह बना रहे। गंदे नाले-नालियों को नर्मदा में सीधे मिलने से रोका जाये एवं नर्मदा के विभिन्न घाटों पर प्रतिबंध के बावजूद पॉलीथिन का प्रयोग हो रहा है, उसे शीघ्र रोका जाये। 
नर्मदा प्रतिमा की स्थापना शास्त्र सम्मन नहीं ...........
संतों ने एक स्वर में कहा कि नर्मदाा जयंती के अवसर पर माँ नर्मदा की प्रतिमा स्थापना शास्त्र सम्मत नहीं है एवं जयंती के दिन ही उनका नर्मदा में विसर्जन अपराध है। 
इस अवसर पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एस.एन. द्विवेदी एवं श्री खरे ने प्रशासनिक तौर पर प्रदूषण रोकने कदम उठाने की बात कही है। इस अवसर पर स्वामी गिरिशानंद के साथ ही डॉ. स्वामी मुक्तानंद, स्वामी पगलानंद स्वामी, स्वामी केवलपुरी, स्वामी राम भारती, पं. रमेश नवेरिया, अशोक रंगा, पं. ओमकार दुबे, नीरज पटेरिया, राजीव अग्रवाल, मनीष दुबे, सुबीर बैनर्जी आदि उपस्थित थे।