सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को कहा कि उसके संभावित विचार में लखनऊ और नोएडा में अपनी तथा बसपा के चुनाव चिह्न हाथी की मूर्तियां (Statues) बनवाने पर खर्च किया गया सारा सरकारी धन मायावती (Mayawati) को लौटाना होगा। कोर्ट एक वकील की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कहा गया था कि सार्वजनिक धन का प्रयोग अपनी मूर्तियां बनवाने और राजनीतिक दल का प्रचार करने के लिए नहीं किया जा सकता।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, ''हमारे संभावित विचार में मायावती को अपनी और चुनाव चिह्न की मूर्तियां बनवाने पर खर्च हुआ सार्वजनिक धन सरकारी खजाने में वापस जमा करना होगा। 

पीठ ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए दो अप्रैल की तारीख तय की है। पीठ ने यह स्पष्ट किया कि यह अभी संभावित विचार है क्योंकि मामले की सुनवाई में कुछ वक्त लगेगा। पीठ ने कहा कि मामले की अंतिम सुनवाई दो अप्रैल को होगी।

बता दें कि हाथरस निवासी गौरव अग्रवाल की आरटीआई के जवाब में कई साल पहले उप्र निर्माण निगम ने बताया था कि मायावती की लखनऊ में लगी मूर्तियों पर 3.50 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। कुछ मूर्तियां डीपीएम डिजायन अहमदाबाद ने बनाईं। इन पर 322 लाख रुपये खर्च हुए। रामसुतार फाइन आर्ट वर्क्स, नोएडा द्वारा तैयार मूर्ति पर 13.62 लाख रुपये खर्च हुए।