काठमांडू । हिमालय पर्वत श्रंखला और हिंदूकुश में इस सदी के अंत तक तापमान बढऩे के साथ बर्फ पिघलने में तेजी आ जाएगी, जो चीन और भारत समेत 8 देशों की नदियों के जल प्रवाह को प्रभावित करेगी। इसका कृषि के साथ-साथ बड़ी आबादी पर इसका खतरनाक असर पड़ेगा। 
मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने इस आशय की चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि विशाल ग्लेशियर हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र (एचकेएच) बनाते हैं, जो विश्व की सबसे ऊंची चोटियों माऊंट एवरेस्ट और के-2 के इलाके में स्थित है। रिपोर्ट जारी करने वाली टीम के सदस्य वैज्ञानिक फिलीपस वेस्टर ने कहा यह जलवायु संकट है, जिसके बारे में आपने नहीं सुना होगा। 
इंटरनैशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माऊंटेन डेवलपमेंट(आईसीएमओडी) के वैज्ञानिक वेस्टर ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से प्रभावित ग्लेशियर से ढके पहाड़ की चोटियां एक सदी से भी कम समय में चट्टानों में बदल जाएंगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र की एक-तिहाई से अधिक बर्फ सन् 2100 तक पिघल जाएगी। बर्फ पिघलने से यांग्त्जी, मेकॉन्ग, सिंधु और गंगा सहित नदियों का प्रवाह बाधित होगा, जहां किसान शुष्क मौसम में ग्लेशियर के पिघले पानी पर भरोसा करते हैं। उन्होंने बताया कि पर्वतीय इलाकों में लगभग 25 करोड़ और घाटियों में 1.65 अरब लोग रहते हैं। 
नदियों में पानी बढऩे और उसके प्रवाह में परिवर्तन से भी जल विद्युत उत्पादन को नुक्सान पहुंच सकता है और पहाड़ों के खिसकने तथा भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाएंगी। हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में बर्फ पिघलने से 1.5 मीटर तक समुद्र का स्तर बढ़ जाएगा। यह क्षेत्र पूरे अफगानिस्तान, बंगलादेश, भूटान, चीन, भारत, म्यांमार, नेपाल और पाकिस्तान में 3500 किलोमीटर तक फैला हुआ है।