लंदन । रोबोट ने मनुष्य के जीवन को बेहद सुगम बना दिया है। घर के सामान्य कामकाज से लेकर बड़े-बड़े कारखानों में उत्पादन से जुड़ कर रोबोट ने इनसान का जीवन बेहद आसान कर दिया है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सन 2045 तक रोबोट इंसान से शादी के लायक भी हो जाएंगे। दुनिया में सोफिया नामक रोबोट बनाकर तहलका मचाने वाले वैज्ञानिक ने यह दावा किया है। इनसानों जैसी समझ वाली रोबोट सोफिया को बनाने वाले निर्माता डॉ. डेविड हान्सन ने एक नए शोध पत्र में ‘द एज ऑफ लिविंग इंटेलीजेंट सिस्टम एंड एड्रॉयड सोसायटी' नाम से प्रकाशित लेख में बताया है कि बहुत जल्द एंड्रॉयड आधारित रोबोट इंसान से शादी से करने के लायक भी हो जाएंगे। उनका कहना है कि 2045 तक ऐसे रोबोट शादी के अलावा जमीन की खरीद-बिक्री के साथ वोट डालने जैसे काम भी कर सकेंगे।
डॉ. डेविड हान्सन ने कहा कि एंड्रॉयड आधारित रोबोट सन 2035 तक वह सबकुछ करने में सक्षम होंगे जो इंसान अभी कर रहे हैं। साथ ही उनकी यह तरक्की यहीं नहीं रुकने वाली है। हान्सन का कहना है कि सन 2038 तक रोबोट इंसानों की तरह सामाजिक अधिकारों की मांग भी करेंगे और उसके लिए आन्दोलन भी चलाएंगे। पुराने रोबोटिक वेरिएंट के मुकाबले रोबोट सोफिया रोबोट के हावभाव इंसानों से ज्यादा मिलते-जुलते हैं। इंसानों जैसा दिखने, बोलने और मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए वह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और फेशियल रिकॉग्निशन का प्रयोग करती है। हान्सन इस रोबोट को कई टीवी कार्यक्रमों में ला चुके हैं। 2038 तक रोबोट इंसानों की तरह अधिकारों की मांग भी करेंगे।  
हर इंसान चाहता है कि अंगुली के इशारे पर सारे काम हो जाएं। इस होड़ में इंसान की तरह तेज दिमाग वाली मशीनें सामने आ रही हैं। हान्सन का कहना है कि इस चाहत का भी एक शीर्ष स्तर आने वाला है, जिसके बाद बड़ी अजीब स्थिति सामने आ सकती है। उनका कहना है कि एक समय आएगा जब रोबोट इनसानों से अपने हक की मांग करते हुए अपने लिए आजादी की मांग भी करेंगे। निर्माता डेविड हान्सन ने अमेरिकी मॉडल ऑड्रे हेप्बर्न (1929-1956) की शक्ल जैसी ह्यूमनॉइड रोबोट का इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर तैयार करके उसे सोफिया नाम दिया। इस रोबोट का आकार महिलाओं जैसा है और यह विजुअल प्रोसेसिंग, वॉयस रिकॉग्निशन और कई अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके इंसानों जैसे हावभाव दिखाती है। साथ ही उसमें सामाजिक कौशल भी है। रोबोट के इंसान से शादी लायक बनने की बात फिलहाल किसी के गले नहीं उतर रही है। लेकिन हॉन्सन का कहना है कि बहुत जल्द यह हकीकत में बदलने वाला है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि जब रोबोट इस लायक हो जाएंगे तो समाज और कानून में उनको वाजिब हक देने को लेकर बहस हो सकती है।