यहां जो जानकारी दी जा रही है वह शोध का विषय है। जिस तरह भगवान ब्रह्मा और प्रॉफेट अब्राहम, राजा मनु और प्रॉफेट नूह की कहानी में असाधारण रूप से समानता है उसी तरह कृष्ण, मूसा और ईसा मसीह के जीवन में भी समानता है। समानताओं के आधार पर निश्‍चित ही यह कहा जा सकता है कि प्राचीनकाल में सभी धर्मों के रीति-रिवाज और नियम एक ही थे और संभवत: उक्त धर्मों की स्थापना किसी एक ही जाति समूह के लोगों ने की होगी। आओ जानते हैं इसी तरह की समानता को लेकर एक अन्य जानकारी। 

भगवान श्रीकृष्ण और प्रॉफेट मूसा :
कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण और प्रॉफेट मूसा और उनके भाई बलराम और हारून में बहुत हद तक समानता है, फिर भी दोनों अलग-अलग सभ्यताओं के जन्म देने वाले प्रॉफेट हैं। आओ हम जानते हैं कि उनमें क्या और किस तरह की समानताएं हैं?

1. भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के पहले अत्याचारी कंस के लिए आकाशवाणी हुई थी कि देवकी की 8वीं संतान तेरा वध करेगी। उसी तरह मूसा के जन्म के पहले मिस्र के राजा फराओ के लिए भविष्यवाणी की गई थी कि तेरा अंत इसराइल में जन्मे एक व्यक्ति के हाथों होगा, जो जन्म ले चुका है।

2. आकाशवाणी सुनने के बाद कंस ने 8वीं संतान के उत्पन्न होकर गायब होने के बाद राज्य के सभी बच्चों को मारने का हुक्म दे दिया था। ठीक उसी तरह मिस्र के राजा ने भी राज्य के सभी बच्चों को मारने का हुक्म दे दिया था, जो 1 वर्ष से कम उम्र के थे।

3. हुक्म के पहले ही जिस तरह भगवान श्रीकृष्ण को उनके पिता ने एक सूपड़े में रखकर नदी के पार नंद के यहां छोड़ दिया था, उसी तरह मूसा की माता ने मूसा को एक टोकरी में नदी में छोड़ दिया था। कुछ समय बाद मिस्र की रानी ने जब उस टोकरी को देखा तो उन्होंने उसमें से उस बच्चे को लेकर उसका पालन-पोषण किया। इस तरह श्रीकृष्ण और प्रॉफेट मूसा को दूसरी मां ने पाला।

4. जिस तरह श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम थे लेकिन प्रमुखता श्रीकृष्ण की थी, इसी तरह प्रॉफेट मूसा के बड़े भाई हारून थे लेकिन प्रसिद्धि प्रॉफेट मूसा को ही मिली।

भगवान कृष्ण और ईसा मसीह :
1. फ्रांस के साहित्यकार और वकील एवं 'द बाइबिल इन इंडिया' लिखने वाले लेखक लुईस जेकोलियत के अनुसार कृष्ण और क्राइस्ट दोनों का ही अर्थ आकर्षण होता है। कहते हैं कि क्राइस्ट शब्द कृष्ण का ही रूपांतरण है। कृष्ण को भारतीयों गांवों में क्रिसना कहा जाता है। यह क्रिसना ही यूरोप में क्राइस्ट और ख्रिस्तान हो गया। बाद में यही क्रिश्चियन हो गया।

2. कृष्ण और ईसा मसीह दोनों के जन्म की भविष्यवाणी बहुत पहले से कर दी गई थी।

3. कृष्ण विष्णु के अवतार थे तो ईसा मसीह येहवेह (यहोवा) के अवतार माने जाते हैं।

4. कृष्ण कुरुस, अभीरा और यादव के प्रतीक रूप थे तो ईसा मसीह कोरेश, हिब्रू और यहूदी का प्रतीक रूप थे।

5. कृष्ण का पहला नाम वासु था और ईसा मसीह का पहला नाम येसु था।

6. कृष्ण और ईसा मसीह दोनों के ही जन्म की उत्पत्ति अलग ही थी। कहते हैं कि उन्होंने किसी गर्भ से जन्म नहीं लिया था। दोनों का ही जन्म रात के अंधेरे में हुआ। एक का जेल में तो दूसरे का घुड़साल में।

7. दोनों को ही अपने वास्तविक पिता से दूर रहना पड़ा लेकिन जिस तरह कृष्ण को रक्षक के रूप में नंद मिले, उसी तरह ईसा मसीह को जोसेफ मिले।

8. दोनों जब शिशु थे तब उन पर राक्षस ने प्रहार किया था और उन्हें मारने का प्रयास किया था लेकिन दोनों ही बच गए।

9. अपने शिशु की रक्षा करने के लिए नंद को गोकुल छोड़कर वृंदावन जाना पड़ा था, दूसरी ओर जोसेफ को भी ऐसा ही करना पड़ा था।

10. भगवान श्रीकृष्ण जहां गोपालक थे वहीं ईसा मसीह भी भेड़पालक थे अर्थात दोनों ही चरवाहे थे।

11. कृष्ण की महिला उपासक का नाम मीरा था, तो ईसा मसीह की महिला उपासक का नाम मेरी मेग्डेलेन।

12. दिसंबर में गीता जयंती का उत्सव होता है तो दूसरी ओर ईसा के जन्म का उत्सव मनाया जाता है।

13. भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भी उसी तरह मनाया जाता है जिस तरह ईसा मसीह का जन्म उत्सव।

14. कृष्ण ने द्रौपदी के पात्र में चावल का एक दाना डालकर हजारों साधुओं को भोजन करा दिया था, उसी तरह ईसा ने टोकरी में रोटी के टुकड़े रखकर कई लोगों को भोजन करा दिया था।

15. दोनों की ही मृत्यु तेज नुकीली वस्तु से हुई थी। एक की कील ठोंकने से, तो दूसरी की तीर लगने से।

इस तरह हमने देखा कि भगवान श्रीकृष्ण, प्रॉफेट मूसा और ईसा मसीह में कितनी समानताएं हैं। हालांकि यह शोध का विषय है। यह आलेख मात्र जानकारी हेतु है। इस लेख में दिए गए विभिन्न तथ्‍य इंटरनेट के विभिन्न स्रोतों से एकत्रित किए गए हैं।