लाहौर: पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि उनके देश का भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का कोई इरादा नहीं है और नयी दिल्ली को कश्मीरी अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक से टेलीफोन पर उनकी बातचीत को मुद्दा नहीं बनाना चाहिए. भारत ने बुधवार को पाकिस्तान के उच्चायुक्त सोहेल महमूद को तलब किया था और उन्हें स्पष्ट रूप से बताया था कि कुरैशी द्वारा फोन पर की गई बातचीत भारत की एकता को तोड़ने का 'शर्मनाक प्रयास' है और यह उसकी संप्रभुत्ता तथा क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करता है.

विदेश सचिव विजय गोखले ने महमूद को 'आगाह' किया कि ऐसे व्यवहार के 'प्रभाव' होंगे. डॉन अखबार के मुताबिक, मुल्तान में शनिवार को मीडिया से बातचीत में कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान का भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का कोई इरादा नहीं है लेकिन नयी दिल्ली को अपनी दिक्कतों के लिए इस्लामाबाद को जिम्मेदार ठहराना बंद करना चाहिए.

उन्होंने यह माना कि उन्होंने हुर्रियत नेता मीरवाइज से बात की और कहा कि भारत को इसे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने कुरैशी के हवाले से कहा, 'हम बातचीत के जरिए कश्मीर विवाद हल करना चाहते हैं लेकिन भारत अनावश्यक हंगामा कर रहा है.' उन्होंने कहा, 'भारत में मुद्दे उभर रहे हैं लेकिन पाकिस्तान की उसमें कोई भूमिका नहीं है.' 
कुरैशी ने कहा कि वह इस सप्ताह लंदन में हाउस ऑफ कॉमन्स में एक कार्यक्रम में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के विचार रखेंगे. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि भारत में चुनाव अंदरुनी मामला है और अगर नई सरकार पाकिस्तान के साथ काम करना चाहेगी तो वह उसके साथ बात करने की कोशिश करेगा. भारत ने पाकिस्तान को साफ शब्दों में कह दिया है कि वार्ता और आतंकवाद साथ साथ नहीं चल सकते.

कुरैशी ने दावा किया कि मौजूदा सरकार की सफल कूटनीति के कारण कई देशों के साथ पाकिस्तान के रिश्ते सुधरे हैं. उन्होंने कहा कि सऊदी के शहजादे इस महीने पाकिस्तान की यात्रा पर आएंगे. उन्होंने कहा, 'उनकी यात्रा के दौरान नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.' पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा था कि कुरैशी ने हुर्रियत नेता से बात की और उनसे कश्मीर मुद्दे को उठाने के पाकिस्तान के प्रयासों पर चर्चा की.
नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने कहा कि समस्त जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा तथा पाकिस्तान को जम्मू कश्मीर से संबंधित किसी भी मामले में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है. यह बात पाकिस्तान के उच्चायुक्त को स्पष्ट कर दी गई है. 

नई दिल्ली में सरकार के सूत्रों के अनुसार, भारत मंगलवार को दिए पाकिस्तान के बयान पर नाराज है जिसमें कश्मीर मुद्दे पर केंद्रित बातचीत की जानकारियां साझा की गई. सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी नेताओं ने पहले भी कश्मीर में अलगाववादियों से टेलीफोन पर बात की है लेकिन हाल के वर्षों में यह शायद पहली बार है कि इस्लामाबाद ने चर्चा की बातों के बारे में एक बयान जारी किया जिसके बारे में भारत को लगता है कि यह साफ तौर पर सीमा लांघने का मामला है. 

इस बीच, पाकिस्तान के अहम राजनीतिक दलों ने शनिवार को सर्वदलीय कश्मीर सम्मेलन के अंत में संयुक्त घोषणापत्र जारी किया और कहा कि कश्मीर मुद्दे को हल किए बिना क्षेत्र में शांति लाना संभव नहीं है. घोषणापत्र में पाकिस्तान सरकार से कश्मीर के मुद्दे को हल करने के लिए प्रभावी विदेश नीति तैयार करने का आह्वान किया गया है.