वैदिक ज्योतिष के अनुसार, देवउठनी एकादशी के बाद से गुरु अस्त चल रहे थे और अब 7 दिसंबर, शुक्रवार को उदित हो रहे हैं। गुरु के उदय होने के साथ ही शुभ कार्यों का आयोजन, विवाह कार्य, ग्रह प्रवेश, नामकरण इत्यादि कार्यक्रम होने शुरू हो जाएंगे। जीवन में हर तरह के सुख के लिए कुंडली में गुरु का सही होना जरूरी होता है। साथ ही वैभव और जीवन-यापन के लिए शुक्र की स्थिति शुभ होना जरूरी होती है। इस बार गुरु 7 दिसंबर को उदित हो रहे हैं और इस दिन शुक्रवार भी है। तो शुक्र और गुरु की कृपा एक साथ प्राप्त करने के लिए आप ये आसान काम शुरू कर सकते हैं…

जब किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु की स्थिति ठीक नहीं होती तो उसके जीवन में कई ऐसी घटनाएं घटती हैं, जो इस तरफ इशारा करती हैं कि उसे गुरु से जुड़े उपाय करने चाहिए।
कम उम्र में ही जिस व्यक्ति के खोपड़ी के बीचोंबीच या चोटी बनाने के स्थान से बाल झड़ने लगे हैं तो यह कुंडली में गुरु की स्थिति खराब होने का संकेत होता है।
जिस व्यक्ति की कुंडली मैं बैठा गुरु उसका साथ न दे रहा हो, ऐसे व्यक्ति के बारे में अफवाहें बहुत फैलती हैं। लोग उसके बारे में क्या-क्या बातें बनाकर बोलने लगते हैं और खुद उस व्यक्ति को कुछ पता ही नहीं होता कि आखिर हुआ क्या है!
कुंडली में गुरु की स्थिति खराब होने पर परेशानी के समय में व्यक्ति अकेला रह जाता है। उसका अपना परिवार और नजदीकी लोग भी उसका साथ छोड़ देते हैं।
खराब गुरु सेहत को भी प्रभावित करता है। यदि गुरु अनुकूल न हो तो व्यक्ति को पाचन तंत्र से जुड़ी दिक्कतें अक्सर होती रहती हैं। वह शारीरिक रूप से खुद को कमजोर महसूस करता है। कमर के नीचे के हिस्से में दर्द रहता है, साथ ही कफ से जुड़ी दिक्कतें होती रहती हैं। किडनी की समस्या भी हो सकती है।
जिस व्यक्ति की कुंडली में गुरु प्रतिकूल प्रभाव दे रहा होता है, उस व्यक्ति की कुंडली में जब राहु और केतु की दशा आती है तो उसकी परेशानियां कई गुना बढ़ जाती हैं। साथ ही प्रतिकूल गुरु स्वयं की दशा आने पर भी व्यक्ति को हर तरफ से परेशान करता है।
जीवन में स्थायित्व और सफलता के लिए गुरु का ठीक होना जरूरी है। इसके लिए कुछ आसान से उपाय कर प्रतिकूल गुरु को अनुकूल बना सकते हैं।
हर मंगलवार को छोटा-सा तांबा किसी वीरान जगह पर दबा दें। ऐसा आपको जीवनभर करना होगा। इसके लिए आप तांबे के तार का टुकड़ा भी प्रयोग कर सकते हैं।
हर व्यक्ति को अपने जीवन में गुरु जरूर बनाना चाहिए। गुरु बनाने के बाद उनकी पूजा-अर्चना करें और उन्हें सम्मान दें। ऐसा करना जरूरी है। आप चाहें तो किसी देवता को भी अपना गुरु बना सकते हैं। पूरे मन से उनका सम्मान करें।
गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करना है तो गणेश जी का पूजन करें। अथर्वोशीश का पाठ करें या ‘ऊं गं गणपतये नम:’ मंत्र का जप रोज करें। ज्यादा संभव न हो तो हर रोज देसी घी का दीपक जलाकर गणेशजी की आरती करें। हर महीने की गणेश चतुर्थी को मोदक बनाकर गरीब बच्चों में बांट दें। खुद न खाएं।
सफेद और चिकना पत्थर या चांदी की कोई बॉल सोते समय अपने बिस्तर पर सिरहाने की तरफ रखें। यह कार्य आपको सदैव करना होगा।
सरकार से मिला हुआ पैसा अपनी तिजोरी में रखें। यह पैसा किसी निवेश का रिफंड हो सकता है या आपके पीएफ का ही कुछ अंश हो सकता है। जब यह धन मिले तो इसका कुछ हिस्सा घर की तिजोरी में सदा के लिए रख दें।
हमारे समाज में प्राचीन परंपरा रही है कि पहली रोटी गाय को खिलानी चाहिए और आखिरी रोटी कुत्ते को। गुरु को ठीक करने के लिए गाय और कुत्ते दोनों की रोटी निकालें। नहीं तो कुत्ते को रोटी डालते समय कुछ दानें चीनी के अवश्य डालें।
अपने बुजुर्गों या पूर्वजों के नाम से गुरुवार को दान करिए। कोई भी वस्त्र या वस्तु हर गुरुवार को किसी बुजुर्ग या विद्वान व्यक्ति को बताकर दें कि यह मैंने उनके नाम पर खरीदा है। आप चाहें तो मंदिर में पुजारी जी को भी दे सकते हैं।
किसी गार्डन में पीपल के वृक्ष लगाएं और उन्हें समय-समय पर पानी से सींचें। ऐसा करने से आपको सभी देवताओं की कृपा प्राप्त होती हैं।