मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बैठकर अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने वाली एमपी पुलिस का डंका अमेरीका में भी बज रहा है. पुलिस ठगी का शिकार हुए अमेरीकी नागरिकों को न्याय दिला रही है. एफबीआई की इंवेस्टिगेशन टीम भी फ्रॉड केस की जांच में एमपी पुलिस की मदद कर रही है.

दरअसल, हाल ही में भोपाल पहुंची एफबीआई की टीम ने साइबर पुलिस के अफसरों से मुलाकत की और फ्रॉड केस के मामले में प्रशंसा पत्र और स्मृति चिन्ह दिया था. उनका भोपाल आने का एक ही मकसद है कि इंद्रपुरी में संचालित कॉल सेंटर द्वारा अमेरिकी और कैनेडियन नागरिकों से हुई धोखाधड़ी के आरोपियों की गिरफ्तारी की जा सके.एफबीआई की टीम ने ठगी के शिकार 20 अमेरिकी नागरिकों के बयान, अपराध में उपयोग किए गए फर्जी ईमेल, आईडी, अमेरिका के नागरिकों को भेजे जा रहे फर्जी दस्तावेज, अरेस्ट वारंट, जब्त अमेरिकन नागरिकों का डाटा वेरीफिकेशन कर साक्ष्य साइबर क्राइम को सौंपे थे, साथ ही एफबीआई के अफसर सुहैल दाउद ने अमेरिकन नागरिकों द्वारा की गई नई शिकायतों को भी सायबर पुलिस को सौंपा था.अब एमपी पुलिस ठगी के शिकार अमेरीकी नागरिकों को न्याय दिला रहे हैं. एफबीआई ने भी भरोसा दिलाया है कि उनको किसी भी नागरिक के बारे में जानकारी चाहिए तो वह वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए ले सकते हैं. इसके अलावा कोर्ट में जब मामला चलेगा, तो शिकायतकर्ताओं के बयान भी अमेरीका से वीडिया कांफ्रेंसिग के जरिए दर्ज किए जाएंगे.

क्या था मामला
-अहमदाबाद के कपड़ा व्यापारी के 12वीं पास बेटे अभिषेक पाठी ने बीई छात्रों के साथ मिलकर अमेरिका के पांच हजार नागरिकों से 70 करोड़ की ठगी की वारदात को अंजाम दिया था. गिरोह को इसका 20 लाख कमीशन रुपयों में मिला है.

-गिरोह ने वारदात को अंजाम भोपाल के इंद्रपुरी में फर्जी कॉल सेंटर खोला था
-लोन सेटलमेंट के नाम पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर ठगी करते थे
-गिरोह के अमेरिका में बैठे साथी 2 हजार से लेकर 3 हजार डॉलर तक एक मामले में वसूलते थे
-अमेरीका से बिटकॉइन, हवाला और मनीग्राम के जरिए माध्यम से हासिल करते थे
-इंदपुरी में बीते एक साल से फर्जी कॉल सेंटर संचालन किया जा रहा था
-साइबर सेल ने फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर अभिषेक के साथ मोहम्मद फरहान खान,
श्रवणकुमार, शुभम गीते, सौरभ राजपूत, वत्सल दीपेशभाई गांधी समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया था
-अहमदाबाद निवासी आरोपी वत्सल ने अभिषेक को अमेरीका नागरिकों को डाटा उपलब्ध कराया था
-गिरोह के पास 12 लाख अमेरीका नागरिकों के कॉन्टेक्ट नंबर मिले थेकॉन्टेक्ट नंबर
-12 लाख अमेरिकी निशाने पर थे, इनमें से 3 लाख को मैसेज कर चुके थे
-आरोपी अभिषेक और रामपाल ही अमेरिकन एजेंट से बात करते थे
-आरोपी फरहान, मौर्य, शुभम और सौरभ अमेरिकी लोगों को मैसेज भेजते थे, जिसमें फर्जी वारंट होता था
-अमेरीका नागरिकों का कॉल आने पर अभिषेक और रामपाल ही बात करते थे
-आरोपी अभिषेक और रामपाल ने अहमदाबाद से अमेरिकन लहजे में ट्रेनिंग ली थी
-कॉल सेंटर रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक चलता था, क्योंकि इस दौरान अमेरिका में दिन होता है

अमेरिका में बैठा माइकल डेनियल लीड करता था. भोपाल से अमेरिकियों को इंटरनेट और वाट्सएप
कॉलिंग की जाती थी. सेटलमेंट के नाम पर डेनियल से बात करने को कहा जाता था. डेनियल सेटलमेंट कर लेता और फिर वह मनीग्राम, बिटकॉइन और हवाला के जरिए पीड़ितों से पैसा अपने खाते तक पहुंचवा लेता.

ये मध्यप्रदेश पुलिस के लिए अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है कि उसके खुलासे के बाद एफबीआई जैसी एजेंसी सामने आई है. एफबीआई अमेरीका में फ्रॉड से जुड़ी गैंग की तलाश कर रही है. इस केस से जुड़े तमाम जांच को साझा भी किया जा रहा है. आगे भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए एफबीआई सायबर पुलिस की हर स्तर पर मदद करेगी.