नई दिल्ली,  पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन के साथ उसकी नीयत में भी बदलाव की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन भारत को लेकर इमरान खान की सरकार भी पुराने ढर्रे पर नजर आ रही है. अभी इमरान खान को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बने दो दिन भी नहीं बीते कि उनकी सरकार ने भारत को तेवर दिखाने शुरू कर दिए.

सोमवार को 21 सदस्यों वाली इमरान खान कैबिनेट के 16 मंत्रियों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली. विदेश मंत्री की जिम्मेदारी शाह महमूद कुरैशी को दी गई. पदभार ग्रहण करते ही शाह महमूद ने भारत के खिलाफ न सिर्फ दुष्प्रचार किया, बल्कि वो परमाणु बम तक पहुंच गए. उन्होंने कश्मीर का राग अलापते हुए इशारों-इशारों में ये भी कह दिया कि कुछ ताकतें पाकिस्तान को बांटने में लगी हुई हैं. शाह महमूद का यह बयान ठीक वैसा ही है, जो अतीत में पाकिस्तानी हुक्मरान देते रहे हैं.

पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, शाह महमूद ने अपने संबोधन में कहा, 'मैं भारत के विदेश मंत्री को बताना चाहता हूं कि हम सिर्फ पड़ोसी नहीं हैं, बल्कि परमाणु शक्तियां भी हैं. हम दोनों के पास बहुत सारी समान चीजें हैं.'

शाह महमूद ने भारत के साथ बातचीत और दोनों मुल्कों के बीच शांति की बात तो कही लेकिन साथ ही  अपने पास परमाणु बम होने की गीदड़भभकी भी दी. उन्होंने कहा, 'शांति से बातचीत करना ही इकलौता विकल्प है. भारत को दुस्साहस छोड़ना होगा और आगे साथ आना होगा. हम जानते हैं कि मसले काफी मुश्किल हैं और तुरंत इनका समाधान नहीं हो सकता, लेकिन हमें आगे बढ़ना होगा.'

शाह महमूद ने पाकिस्तान के अतीत के अपराधों को भुलाते हुए बड़ी ही बेबाकी से कहा कि कश्मीर एक सच्चाई है, जिसे दोनों देश समझते हैं, लेकिन भारत और पाकिस्तान को इन मसलों को सामने रखकर आगे बढ़ना होगा. उन्होंने ये भी कहा कि भारत और पाकिस्तान को बिना किसी रुकावट के लगातार बातचीत करनी होगी.

यानी बातचीत के बीच कश्मीर का मुद्दा पाकिस्तान की पुरानी सरकार भी उठाती रही हैं. साथ ही सरहद पार से परमाणु बम होने की आवाजें भी भारत को चेताती रही हैं. ऐसे में नया पाकिस्तान बनाने के नारे के साथ सत्ता में आए इमरान खान और उनकी सरकार भी अगर कश्मीर और परमाणु संपन्नता तक ही सीमित रही तो शांति बहाली का रास्ता कितना सफल हो पाएगा, ये बड़ा सवाल है.