नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने जीडीपी की बैक सीरिज के आंकड़ों में संप्रग शासन में एक साल विकास दर 10 प्रतिशत से ऊपर जाने का अनुमान सामने के बाद सरकार पर हमलावर हुई कांग्रेस को करारा जवाब दिया है। जेटली ने संप्रग शासन में बेलगाम महंगाई दर और बेकाबू घाटे का हवाला देकर कांग्रेस को आईना दिखाया है। जेटली ने कहा कि संप्रग के कार्यकाल में जो महंगाई दर बढ़कर दहाई के अंक में पहुंच गई थी उस पर अब काबू पा लिया गया है।

जेटली ने यह भी कहा कि बीते चार साल में वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बावजूद भारत ने तेज आर्थिक वृद्धि दर हासिल की है और तीव्र विकास दर के मामले में चीन को पछाड़ दिया है।

जेटली ने फेसबुक पर लिखे पोस्ट में संप्रग सरकार के दौरान अर्थव्यवस्था में महंगाई दर, चालू खाते के घाटे, राजकोषीय घाटे और बैंक कर्ज में वृद्धि के आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए कहा कि संप्रग शासन में राजकोषीय अनुशासन से समझौता किया गया और बैंकिंग तंत्र को सोचे समझे बगैर ही उधार बांटने को कहा गया। इस तथ्य को भी नजरंदाज कर दिया गया कि ऐसा करने से बैंकों का जोखिम बढ़ जाएगा।

जेटली ने कहा कि संप्रग-1 सरकार जब 2004 में सत्ता में आई उस समय वाजपेयी सरकार 8 प्रतिशत विकास दर विरासत में छोड़कर गई थी। उसे 1991 से 2004 तक जारी रखे गए सुधारों का लाभ भी मिला। हालांकि संप्रग-1 के कार्यकाल में कोई भी महत्वपूर्ण घरेलू सुधार नहीं किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि विकास दर गिरने लगी और संप्रग-2 के अंतिम तीन वर्षों में विकास दर काफी कम रही।

2014 की मंदी के बाद भी अर्थव्यवस्था में तेजी

जेटली ने यह पोस्ट ऐसे समय लिखा है जब हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में जीडीपी के बैक सीरिज आंकड़े प्रस्तुत करते हुए यह अनुमान लगाया है कि संप्रग सरकार के कार्यकाल में एक साल देश की विकास दर 10 फीसदी से ऊपर थी। जेटली ने कहा कि जिन वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में उछाल था, उन वर्षों में भारत ही नहीं दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं ने अच्छी विकास दर हासिल की। हालांकि जब वैश्विक अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ गई तो अन्य देशों की विकास दर भी धीमी पड़ गई। सिर्फ भारत ही ऐसा देश है जो 2014 के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आने के बाद भी तेजी से बढ़ रहा है।

संप्रग व राजग राज में खुदरा महंगाई की रफ्तार

अवधि प्रतिशत

1999-2004 4.1

2004-2009 5.8

2009-2014 10.4

2014 से अब तक 4.7

चालू खाते का घाटा /सरप्लस

अवधि प्रतिशत

1999-2004 0.5

2004-2009 1.2

2009-2014 3.3

2014 से अब तक -1.2

आधिकारिक नहीं 10 फीसदी विकास दर के आंकड़े

सरकार ने जीडीपी के उन आंकड़ों को गैर-आधिकारिक करार दिया है जिसमें पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के कार्यकाल में एक साल देश की विकास दर 10 फीसदी से ऊपर रहने का अनुमान लगाया गया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय का कहना है कि जीडीपी की बैक सिरीज (पिछले वर्षों) के इन आंकड़ों की गणना एक समिति ने की है। ये आधिकारिक अनुमान नहीं हैं। इन्हें अभी मंजूरी नहीं मिली है। मंत्रालय बाद में आधिकारिक आंकड़े जारी करेगा।

मंत्रालय की ओर से यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) की "रियल सेक्टर स्टेटिस्टिक्स" पर गठित समिति ने हाल में जारी अपनी रिपोर्ट में "आधार वर्ष 2011-12" पर 1993-94 से 2013-14 तक जीडीपी के आंकड़ों की गणना कर यह निष्कर्ष निकाला है कि वित्त वर्ष 2006-07 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 10.08 फीसदी वृद्धि दर्ज की जो 1991 के बाद से सर्वाधिक है।

2006-07 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संप्रग सरकार थी, इसलिए जब से इस समिति की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है, कांग्रेस पार्टी सरकार पर हमलावर हो गई है। यही वजह है कि सरकार ने विपक्षी पार्टी को जवाब देने के लिए पहले अपने अर्थशास्त्रियों को आगे किया और अब सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से बाकायदा बयान जारी कर समिति की रिपोर्ट में दिए गए जीडीपी के बैक सिरीज आंकड़ों को खारिज किया गया है।

"गलत हाथों" में देश की अर्थव्यवस्था : चिदंबरम

सांख्यिकी समिति के जीडीपी के नए आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस ने मोदी सरकार पर करारा हमला बोला है। विपक्षी पार्टी की ओर से मोर्चा खोलते हुए पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था गलत हाथों में है। उनका कहना था कि संप्रग-एक और संप्रग-दो के दौरान जहां विकास दर औसतन 8.36 और 7.68 फीसदी थी, जो मोदी सरकार के दौरान कम होकर औसतन 7.33 फीसदी रह गई है।

ताजा आंकड़ों से साफ साबित होता है कि आर्थिक वृद्धि के लिए सबसे बेहतरीन दौर संप्रग सरकार के कार्यकाल (2004-14) के दौरान था। एक सवाल के जवाब में पूर्व वित्त मंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि देश में तीन वित्त मंत्री हैं- डिफैक्टो (वास्तविक), डिजुरे (कानूनी) एवं इनविजिबल (अदृश्य)।