भारतीय संस्कृति में सोलह श्रंगार करना महिलाओं के जीवन का मुख्य अंग रहा है। सोलह श्रंगारों में से बिछिया को 15वां स्थान दिया गया है। हिन्दू धर्म में नाभि से नीचे स्वर्ण धातु के गहने पहना वर्जित है। फिर भी आज फैशन की होड़ में ऐसी वर्जनाओं का पालन सभी महिलाएं नहीं करती हैं। बछियाको पैरों की अंगूलियों में पहना जाता है। सामान्यत: यह चांदी की धातु से बनी होती है। इसे पहनने के पारंपरिक लाभ, वैज्ञानिक, चिकित्सीय और ज्योतिषीय (Astrologically Benefit) फायदे हैं। चांदी धातु चंद्र ग्रह की कारक धातु हैं। एक्यूप्रे़शर शास्त्र के अनुसार पैर की जिन अंगूलियों में बिछिया पहनी जाती हैं, ये अंगूलियों का सीधा संबंध गर्भाशय से जुड़ा होता है।
इस संबंध में एक विचार के अनुसार बिछियों को पहनने से महिलाओं के मासिक चक्र में नियमितता आती हैं। आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार एक मर्म चिकित्सा पद्वति आती हैं जिसके अनुसार महिलाओं संतान प्रजनन क्षमता बेहतर करने के लिए बिछिया को पहना जाता है। गर्भधारण करना इसके कारण आसान होता है। पैरों में पहनी जाने वाली बिछिया अधिकतर चांदी धातु से बनी होती हैं, यह धरती की ऊर्जा को अवशोषित कर शरीर तक पहुंचाने का कार्य करती हैं।


आज के तनाव पूर्ण समय में लगभग प्रत्येक महिला को मासिक चक्र से जुड़ी कोई ना कोई परेशानी लगी ही रहती है। इस स्थिति में महिलाओं का बिछिया पहनना लाभ दायक साबित होता है। एक्यूप्रेशर सिद्धांत यह कहता हैं कि इसे पहनने से अंगूलियों की एक खास नस जिसका सीधा संबंध गर्भाशय से होता हैं, से जुड़ी होती है। जब कोई महिला इसे पहनती हैं तो यह नस दब जाती है, और रक्त से जुड़े विकार दूर होते हैं। साथ ही इससे महिला में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी बना रहता है। यह इच्छा शक्ति को बढ़ाने का एक अच्छा पर्याय है। बिछिया पहनने का एक अन्य लाभ भी हैं यह महिला के तनाव में भी कमी करते हैं और गर्भाश्य, ब्लैडर व आंतों में रक्तसंचरण की प्रक्रिया में सुधार करती हैं। महिलाओं को लेकर एक धारणा प्राचीन समय से रही है, कि पुरुषों के शरीर की तुलना में औरतों का शरीर अधिक कोमल और संवेदनशील होता है। प्रत्येक माह इन में हार्मोंस में बदलाव भी पुरुषों से अधिक होते हैं। घर-परिवार और अब करियर के साथ भाग-दौड़ अधिक रहता है।


महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए अलग अलग तरह के गहनें पहने जाते हैं। इन्हीं में से एक बिछिया है। नियमित रूप से बिछिया पहनने से महिलाओं का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। इस महिला की कुंड्ली में चंद्र शुभ ग्रह के रुप में स्थित हों, उस महिला को चंद्र के सभी फल पाने के लिए चांदी धातु धारण करनी चाहिए। इससे चंद्र ग्रह की शुभता प्राप्त होने लगती है। नाभि से ऊपर सोने के गहने धारण करने की परंपरा हैं और नाभि से नीचे चांदी पहनना शुभ है। चांदी शीतलता प्रदायक और सोना ऊष्मा प्रदायक होता है।
बिछिया पहनने से महिलाओं का हार्मोनल सिस्टम और डाईजेस्टिव सिस्ट्म सही ढ़ंग से काम करता है।
यह एक एक्यूप्रेशर उपचार का प्रकार है, जिसे पहनने से तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों को बल मिलता है।
जो महिलाएं बिछिया पहनती हैं उनका गर्भ धारण और संतान जन्म देना सहज हो जाता है।

 

  • एक्यूप्रेशर के अनुसार मछ्ली के आकार की बिछिया सबसे अधिक उत्तम कही गई है। इस आकार में नसों पर सही दबाब पड़ता है।
  • यही कारण हैं कि इसका प्रचलन हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों की महिलाओं में है। यह ना केवल किसी महिला के विवाहित होने का प्रतीक स्वरुप हैं अपितु इसके साथ कई ज्योतिषीय, चिकित्सीय और वैज्ञानिक कारण जुड़े है।
  • एक मत के अनुसार बिछिया का खोना शुभ नहीं माना जाता। एक बार पहनी गई बिछिया को किसी ओर को पहनने के लिए नहीं देना चाहिए। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में विपदा आने की संभावनाएं रहती हैं।
  • इसके खोने या इसे किसी ओर को पहनने के लिए देने पर जीवन साथी के स्वास्थ्य में कमी, आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है और ऋण बढ़ जाते हैं।