धार्मिक पुस्तकों की मोटाई और इनकी संख्या देखकर हम अक्सर इन्हें पढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। फिर इनके बारे में सुनी-सुनाई बातों के अनुसार अपनी सोच बना लेते हैं। खैर, हम यहां आपको बता रहे हैं कि वेद और पुराणों को समझना बेहद आसान है, बस हमें सही क्रम पता होना चाहिए। आइए यहां जानते हैं…


ब्रह्माजी ने की वेदों की रचना

सबसे पहले ब्रह्माजी ने वेद की रचना की। इस वेद को 4 भागों में बांटा गया, जिनसे 4 वेदों का निर्माण हुआ। इन वेदों के नाम हैं – ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद


इस तरह विभाजित हैं वेद

पद्य में रचित वेद के दो भागों को ऋग्वेद और अथर्ववेद कहते हैं। वेद का गद्य भाग यजुर्वेद और गायन भाग सामवेद कहलाता है।


उपवेद या उपनिषद

वेद विस्तृत हैं। इन्हें समझने के लिए 4 उपवेदों की रचना की गई है। इन्हें ये आयुर्वेद, धनुर्वेद, गंधर्ववेद और स्थापत्यवेद हैं।


वेदांग

वेदों में वर्णित श्लोकों के अर्थ को अच्छी तरह समझने के लिए वेदांग की रचना की गई। वेदांग 6 हैं और प्रत्येक वेदांग में अध्ययन की एक अलग विधा को समझने की युक्ति बताई गई है। इनके नाम इस प्रकार हैं- शिक्षा, कल्प, व्याकरण, ज्योतिष, छंद, निरूक्त


1. शिक्षा- वेद मंत्रों के उच्चारण की सही विधि का वर्णन।

2.कल्प- वेदों में वर्णित किस मंत्र का प्रयोग किस कर्म के दौरान करना चाहिए का वर्णन।

3.व्याकरण- इसमें शब्दों की प्रकृति, प्रत्यय और उनके उच्चाण को समझाया गया है।

4.ज्योतिष- यज्ञ और अनुष्ठान का सही समय ज्ञात करने के लिए।

5. छंद-इसमें छंदों के ज्ञान को विस्तार से समझाया गया है।

6. निरुक्त- वेद में किन शब्दों का प्रयोग किन-किन अर्थों में किया गया है का ज्ञान।


पुराणों के नाम

सनातन धर्म में 18 पुराण हैं। इन 18 पुराणों में अलग-अलग देवी-देवताओं को केन्द्र मानकर पाप और पुण्य, धर्म और अधर्म, कर्म और अकर्म की गाथाएं कही गई हैं। इनके नाम इस प्रकार हैं- विष्णु पुराण, ब्रह्म पुराण, ब्रह्मांड पुराण, भागवत पुराण, पदम पुराण, वराह पुराण, मतस्य पुराण, कूर्म पुराण, वामन पुराण, गरुड़ पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण, शिव पुराण, लिंग पुराण, स्कंद पुराण, नारदीय पुराण, अग्नि पुराण, मार्कण्डेय पुराण, भविष्य पुराण।