मानव के रूप में जन्म हमारे लिए भगवान का सबसे बड़ा उपहार है। मानव जीवन ऊर्ध्वगमन अर्थात मोक्ष की सीढ़ी है। अच्छे कर्मों के लिए मानव जीवन सर्वोत्तम योनि है। देवों के लिए भी दुर्लभ मानव देह प्राप्ति का प्रारंभ अर्थात् जन्मतिथि अपने माता-पिता, पितृगण, देव, ऋषि, मान्यजन, प्रकृति, धरती माता के प्रति कृतज्ञता-समर्पण का विशेष दिवस है।



जन्मदिवस के दिन सुबह शुद्ध जल से स्नान कर नए वस्त्र धारण करके कुलदेवता एवं अन्य देवी-देवताओं का दर्शन व पूजन कर मंगल की कामना करें। बड़ों को प्रणाम कर आशीर्वाद लें। जितनी उम्र है उतने ही दीपक घर या मंदिर में सजाएं। इसी के साथ वर्ष अभिवृद्धि का प्रतीक बड़ा दीपक प्रज्वलित करें। अर्थात आप जितने वर्ष के हैं उससे एक दीपक अधिक प्रज्वलित करें। फिर श्रद्धानुसार जप, हवन, अभिषेक सुंदरकांड, यज्ञ, भजन, कीर्तन आदि का आयोजन रखें। 



सामर्थ्य के अनुसार अभावग्रस्त व्यक्तियों को दान करें तथा मित्रों में प्रसाद वितरित करें। 



जन्मदिवस पर क्या करें? क्या न करें?

नख, केश आदि न कटाएं।



सादगीपूर्ण, धैर्यवान और शांत संतुलित रहें।



घर में बना शुद्ध सात्विक खाद्य पदार्थ ही खाएं।



मादक तथा अखाद्य पदार्थ अर्थात् शराब, तम्बाकू, अंडा, मछली, मांस का सेवन कतई न करें। इनका चिंतन भी न करें।



मन, कर्म या वाणी से किसी का भी अहित न चाहें और न करें अर्थात् सभी प्रकार की हिंसा और आघात से दूर रहें।



किसी से द्वेषभाव न रखें। खुशियां-प्रसन्नता के साथ मिठाई भोजन वितरित करें और सदैव प्रसन्न रहें।