भोपाल। आपका भविष्य आपके आचरण और कर्म पर निर्भर है। यदि आपने अच्छे काम किए हैं तो कोई भी आपके पुण्यों की  वृद्धि से नहीं रोक सकता, यदि गलतियां हुईं हैं तो कोई उन्हें माफ नहीं करा पाएगा। किसी की गलती माफ नहीं होती उसे प्रायशिचत्त करना ही पड़ेगा,दंड भोगना ही होगा। यदि सुखी रहना है, जिंदगी में आगे बढऩा है,परमात्मा का प्रिय बनना है तो अपने आचरण को बेहतर बनाइये। 
यह कहना है भगवान परशुराम कथा आचार्य पं. रमेश शर्मा का। वे मानस भवन में आज से शुरु हुई भगवान परशुराम कथा के पहले दिन बोल रहे थे। पांच दिवसीय इस कथा का आयोजन परशुराम जन परमार्थ समिति की ओर से किया गया है।
कथा का प्रारंभ करते हुए कला आचार्य पं. शर्मा ने कहा कि पुराणों की कथाएं देख लें। गलतियां किसी की भी क्षमा नहीं हुई हैं। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि महाराज दशरथ और सुदामाजी को भी अपनी चूक के लिए प्रायशिचत्त करना पड़ा तो तब किसकी त्रुटि क्षमा होगी? 
आज के प्रसंग में अवतारों की अवधारणा का तार्किक और विकास के वैज्ञानिक क्रम का विश्लेषण किया गया तथा भगवान परशुराम का परिचय देते हुए समझाया कि पूरे विश्व में उनके चिन्ह हैं। वे अकेले हैं जो चिरंजीवी हैं और हर काल में उनका वर्णन मिलता है। उनकी अवतार तिथि के कारण ही वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया अक्षय है, गुरु पूर्णिमा की परंपरा उनसे है। उन्होंने भगवान राम को विष्णु और भगवान कृष्ण को सुदर्शन प्रदान किया। अमरनाथ का आव्हान उन्होंने किया। उन्होंने ही वर्ण व्यवस्था के उस मूल भाव को पुर्नस्थापित किया कि व्यक्ति का मान और सम्मान व्यक्ति के गुण एवं कर्म के आधार पर होना चाहिए।  इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में  वेदांत जी महाराज मटामर, विशेष अतिथि के रूप में खनिज विकास निगम के अध्यक्ष पं. शिव चौबे,भोज विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ. रवीन्द्र कान्हारे, मुख्य यजमान अनिल भार्गव सहित समिति के शलभ गार्गव, विनोद शर्मा,अभिषेक तिवारी तथा संजय मुदगल ा। प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। समिति के शलभ गार्गव ने शहर के सभी धर्म प्रेमी बंधुओं से ज्यादा से ज्यादा संख्या में प्रतिदिन कथा में शामिल होने का आग्रह किया है।