हम च्जीवन की लयज् की बातें करते हैं और कई बार अफसोस जताते हैं कि हमारे समय में ये खो चुकी है। जीवन की यही लय पूरे विश्व में कविता के बीज रोपती है। अगर ये लय न होती तो कविता न होती। कविता में अक्सर जीवन की ये लय भाषा की लय को गढ़ती है जो मनुष्य का अप्रतिम आविष्कार है। जीवन के बिना कोई भाषा संभव नहीं, न ही भाषा के बिना जीवन, कम से कम मनुष्य का जीवन। कविता भाषा और जीवन से रची जाती है। कविता का संसार से एक बहुस्तरीय लेकिन जटिल संबंध है। कविता का जन्म जगत के प्रति प्रेम और अभिलाषा से होता है।

यहां जगत से आशय देश और काल दोनों से है। किसी को ये लग सकता है कि ये धरती केवल चिड़ियों, जानवरों, जंगलों, नदियों इत्यादि के लिए है लेकिन ये दुनिया इंसानों के लिए भी है। धरती को संसार भाषा ने बनाया है। हम कह सकते हैं कि भाषा, ईश्वर, अध्यात्म विशिष्ट मानवीय आविष्कार हैं।

थोड़ी देर के लिए हम इन ख्यालों को किनारे रखकर इस दुनिया में रहने वालों के बारे में सोचे। शायद हम मानवीय इतिहास के सबसे हिंसक समय में जी रहे हैं। इस समय पूरी दुनिया में सैकड़ों गृह युद्ध छिड़े हुए हैं। आतंकवाद, कट्टरपंथ, हत्या का उन्माद, नागरिक जकड़न, प्रवासन, विस्थापन इत्यादि पूरे विश्व में व्याप्त हैं। इसी के साथ है धार्मिक पाखंड से जुड़ी हिंसा, सांप्रदायिकता, नक्सलवाद, घरेलू हिंसा, दलित-मुस्लिम-महिला-असहमतों के साथ होने वाली हिंसा, फैशन, खेल, एंटरटेनमेंट और मीडिया में बढ़ती हिंसा।