ये सितारों से भरा आसमा इतना खमोश क्यों है,

ये चाँद सा चेहरा इतना खमोश क्यों है ।

तेरी चँचलता दिखती है मुझे तेरी आँखों मे,
तेरी नादानियाँ दिखती है मुझे तेरी बातों में।
तू हँसती है खिलखिला कर, लेकिन तेरा मन इतना खमोश क्यों है।
क्या हुनर है तुझमें खुद का गम छुपाकर औरों के साथ हँसने का,
क्या हूनर है तुझमें, औरों के साथ खुश रहकर अपने अरमा कुचलने का ।
तू चंचल नदी है पर पोखर की तरह खमोश क्यों है।
तू माँ भी है तू बेटी भी है तू किसी  की अंगीकारी   है,
तू छुपा रही है ख्व्याइशियों को अपने क्योंकि तू नारी है।
 तू भूलकर खुद को किसी बंधन के आगोश में क्यों है।
मैनें देखा है उस हँसी के पीछे फूटकर रोता हुआ चेहरा ।
मैनें देखा है तेरे दिल का खमोश दर्द गहरा। तू सबको प्यारी है।
क्योंकि इच्छा तूने मारी है। तेरी हँसी बहुत  प्यारी है, उसपर दर्द तेरा भारी है।
अपनों की मस्त महफिल में तेरा दिल खमोश क्यों है।
न बताती हो न सुनाती हो ,कहो हाले दिल अपना मुझसे क्यों छुपाती हो।
जख्म गहरा है क्यों भरना नहि चाहती ,क्यों खुद से रूठी हो जो इतना मुस्कुराती हो।
हँसहँस कर क्यों अपने दिल को जलाती हो।
तेरे दर्द भरे दिल में ,ये तेरी आँखें मदहोश क्यों है।
क्या पाने की चाहत है ,और क्या खोने का गम है।
क्या कोई अपना छूट गया ,या प्यार मिला तुम्हें कम है।
क्यों दर्दे दिल की आदत है, क्यों अरमा इतने कम है।
हँस हँसके सबसे मिलती हो ,क्यों दिल की आँखें नम है।
अरमा सारे मार दिये पर ये समा बडा मदहोश है।
सबकी तुम सुनती हो और गुस्से का नाम नहीं,
औरौं के लिये जी रही और खुद का सम्मान नहीं ।
कुछ छुपा रही हो दिल में तुम ,इतना सीधा तो भगवान नहीं।
बेसुध इतनी बेबस इतनी  तू इतनी  खमोश क्यों  है ।
ये सितारों से भरा आसमा खमोश क्यों है।