शिकायत करूँ तुझसे या तेरा शुक्रिया करूँ।
कभी आसमां दिखा देता है,और कभी जमी पर गिरा देता है।
अकसर ये तेरी इनायत का तुफान मुझे,किनारे से मजधार पर ला देता है।


कभी छमछम करती बारिश तन को भिगा जाती है,
तो कभी चिलचिलाती धूप से मन को जला देता है।
अकसर ये तेरी इनायत का तुफान मुझे,किनारे से मजधार पर ला देता है।


मेरा चलना गवारा नहीं तुझे या मेरा रूकना गवारा नहीं,
कभी चलते हुये रोक देता है मुझे तो कभी सोते हुये चला देता है।
अकसर ये तेरी इनायत का तुफान मुझे,किनारे से मजधार पर ला देता है।


तुझे हँसाने की चाहत है मुझे या रुलाने की आदत,
कभी रोते हुये हँसा देता है तो कभी हँसते हुये रुला देता है।
अकसर ये तेरी इनायत का तुफान मुझे,किनारे से मजधार पर ला देता है।

 

सब बस में है तेरे या कुछ मेरे भी बस में है,
कभी सब बस में है मेरे तो कभी मेरी औकात दिखा देता है।
अकसर ये तेरी इनायत का तुफान मुझे,किनारे से मजधार पर ला देता है।


सितम लोगों का सहूँ या तेरा कि,
कभी खुदा तू है तो कभी  लोगों को खुदा बना देता है।
अकसर ये तेरी इनायत का तुफान मुझे,किनारे से मजधार पर ला देता है।


तेरे समंदर का पानी भी कितना सितम ढाता है मुझ पर,
कभी ये रेत का मेरा घर बना देता है तो कभी मेरा घर बहा देता है।
अकसर ये तेरी इनायत का तुफान मुझे,किनारे से मजधार पर ला देता है।


कबसे खुशियाँ ढूंढ रही हुं तेरी गम भरी दुनिया में,
कभी मेरी दुनिया मिटा देता है तो कभी मेरी खुशियाँ छुपा देता है।
अकसर ये तेरी इनायत का तुफान मुझे,किनारे से मजधार पर ला देता है।


ये तेरा रहम है मुझपर या कैहर है कि ,
कभी मेरे दिवाने होते हैं तो कभी मुझे ही दिवाना बना देता है।
अकसर ये तेरी इनायत का तुफान मुझे,किनारे से मजधार पर ला देता है।


बसकर सितम ढाना मुझपर कि,
कभी ये आरती बेवाक है तो कभी इसे शायर बना देता है।
अकसर ये तेरी इनायत का तुफान मुझे किनारे से मजधार पर ला देता है।

 

शिकायत करूँ तुझसे या तेरा शुक्रिया करूँ।